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Baba Bageshwar: बाबा बागेश्वर को लेकर क्यों हो रही राजनीति? 'मुफ्तानंद' की कहानी पर फिर गरमाई राजनीति

अमित शर्मा
Updated Sun, 09 Jul 2023 04:37 PM IST
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धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री - फोटो : सोशल मीडिया

बाबा बागेश्वर (Baba Bageshwar) पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जहां भी अपना दरबार लगाते हैं, उन पर राजनीति करने के आरोप लग जाते हैं। जब उन्होंने पटना में अपना दरबार लगाया था और जाति छोड़कर हिंदू राष्ट्र निर्माण के लिए सभी हिंदुओं को एक होने की अपील की थी, तब भी राष्ट्रीय जनता दल ने उन पर राजनीति करने का आरोप लगाया था। दिल्ली दरबार में जब उन्होंने 'मुफ्तानंद' की कहानी सुनाई और लोगों से ज्यादा मुफ्त के चक्कर में न पड़ने की बात कही तो यहां भी उन पर इशारों-इशारों में अरविंद केजरीवाल पर राजनीतिक हमला करने के आरोप लगने लगे।


 

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर आरोप लगते हैं कि वे अपनी कथाओं में उन्हीं मुद्दों को उठाते हैं जो किसी राजनीतिक दल के विचारों को फायदा पहुंचाते हैं। हिंदुत्व, हिंदू राष्ट्र, सभी जातियों को छोड़कर एक होने और देश को विश्व गुरु बनाने जैसी बातें बाबा बागेश्वर अपने दरबार में बताते हैं। जब वे अपने गृह क्षेत्र में कथा का आयोजन करते हैं, तब भी उपस्थित जनसमुदाय को इन्हीं मुद्दों पर सावधान करते हैं। जब देश के अलग-अलग हिस्सों में वे जाते हैं, तब भी उन्हीं मुद्दों को जोरशोर से उठाते हैं।

 

हालांकि, ये वही मुद्दे हैं जो भाजपा खुद अपने राजनीतिक अभियानों में इस्तेमाल करती रही है। यही कारण है कि बाबा बागेश्वर धाम के मुद्दों को भाजपा से जोड़कर देखा जाने लगता है, लेकिन इसका कारण केवल यही नहीं है। बाबा बागेश्वर के देश में लग रहे विभिन्न स्थानों पर दरबार को आयोजित करने में भाजपा से जुड़े लोग ही सबसे आगे दिखाई पड़ते हैं। पटना दरबार में भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की आरती उतारते हुए दिखाई पड़े थे। यही कारण है कि विपक्ष के इन आरोपों को बल मिलने लगता है।  


गलत आरोप, कोई भी आयोजित करा सकता है बाबा का कार्यक्रम: भाजपा

दिल्ली भाजपा के वरिष्ठ नेता विक्रम मित्तल ने अमर उजाला से कहा कि बाबा बागेश्वर पर राजनीति करने के आरोप लगाना हास्यास्पद है। उन पर राजनीति करने के आरोप लगाना देश के संतों का अपमान भी है। उन्होंने कहा कि वे एक संत हैं और अपने दरबार में समाज-देश को जागृत करने के मुद्दे उठाते हैं जो कि किसी भी धार्मिक संत से अपेक्षा की जाती है। वे अपनी सभाओं में देश को आगे बढ़ाने और देश के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की बात करते हैं। वे किसी भी जाति-धर्म से भेद नहीं करते हैं और सभी को एक समान सम्मान देते हैं। ऐसे में उनके दरबार में उठे मुद्दों को राजनीति से जोड़कर देखना बिल्कुल गलत है। 


विक्रम मित्तल का कहना है कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कार्यक्रम कोई भी करा सकता है। जिसे भी उनके कार्यक्रम को कराने में रुचि हो, वह उनके दरबार में संपर्क कर सकता है। यह देश के हर नागरिक के लिए खुला है। ऐसे में किसी को यह आलोचना करने का अधिकार नहीं है कि बाबा बागेश्वर किसी राजनीतिक दल का मुद्दा उठाकर चलते हैं। 


भाजपा-कांग्रेस भी अपना रहीं केजरीवाल के मुद्दे: AAP

शालीमार बाग से आम आदमी पार्टी विधायक वंदना कुमारी ने अमर उजाला से कहा कि बाबा बागेश्वर ने अपनी कथा में मुफ्तानंद की कहानी के माध्यम से अरविंद केजरीवाल की मुफ्त की राजनीति पर निशाना साधा है। यह बात आम इंसान को भी समझ में आ रही है कि उनकी इस कहानी के निशाने पर कौन था? आम आदमी पार्टी के नेता ने कहा कि एक तरफ तो भाजपा और कांग्रेस उनकी पार्टियों की नीतियों की आलोचना करती हैं, लेकिन दूसरी तरफ वे उसी नीति की नकल भी करती हैं। ऐसे में यह बात समझ आ जाती है कि उन्हें भी पता है कि अरविंद केजरीवाल की नीतियां लोगों के हित में हैं और इसे आगे बढ़ाना चाहिए। 


वंदना कुमारी ने कहा कि एक तरफ तो प्रधानमंत्री उनकी नीतियों को मुफ्त की रेवड़ी कहकर उनका मजाक उड़ाने की कोशिश करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ वे स्वयं जनता के कल्याण के नाम पर भारी-भरकम छूट वाली घोषणाएं करते हैं। उन्होंने कहा कि इस बात का पैमाना तय होना चाहिए कि किस आधार पर किसी राजनीतिक दल की घोषणाओं को जनता के कल्याण के लिए जारी की गई योजनाएं कहा जा सकता है और किस आधार पर उन्हें मुफ्त की रेवड़ी करार दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सामान्य लोगों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए लगातार काम करती रहेगी। 
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क्या कहा था बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने

बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने दिल्ली दरबार में अपने गांव का एक किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि उनके गांव में एक मुफ्तानंद रहता था जो मुफ्त की चीजों को पाने के लिए हमेशा तैयार रहता था। उन्होंने कहा कि एक बार कहीं पर बर्फ मुफ्त मिल रही थी। मुफ्तानंद उसे लेने पहुंचा, लेकिन बर्फ लेने के चक्कर में उसके कपड़े फट गए। जब वह घर पहुंचा तो खुश होकर अपनी पत्नी को बताया कि वह तीन रूपये की बर्फ मुफ्त लाया है, लेकिन उसकी पत्नी ने कहा कि तीन रूपये की मुफ्त की बर्फ के लिए वह 640 रुपये के नए कपड़े फाड़ लाया है, उसका क्या? उन्होंने कहा कि इसी तरह हमेशा मुफ्त की चीजें नुकसान कर जाती हैं, इसलिए मुफ्त की चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। उनके इस बयान पर सियासत शुरू हो गई है। 

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