पूरी दुनिया को योग के जरिए सेहत का पाठ पढ़ाने वाले बेल्लूर कृष्णमचारी सुंदरराज बचपन से लेकर किशोरावस्था तक बेहद खराब स्वास्थ्य से जूझते रहे। खराब सेहत की वजह से वो अपनी पढ़ाई भी नहीं कर पाए। उनका कमजोर और बीमारी से ग्रसित शरीर दोस्तों के बीच हमेशा मजाक का विषय बना रहता था। मगर एक समय ऐसा भी आया जब इन्हीं बी.के.एस अयंगर ने अपने इतने प्रशंसक बनाए कि उनकी योग पद्धति 'अयंगर योग' के नाम से प्रचलित हुई। कर्नाटक के छोटे से गांव बेल्लूर में पैदा हुए अयंगर दुनियाभर में 'फादर ऑफ माडर्न योगा' के नाम से मशहूर हुए। ऐसे महान योग गुरु की जिंदगी को जानने के लिए गुरु पूर्णिमा के दिन से बेहतर कोई दिन नहीं हो सकता।
योगाचार्य बी.के.एस अयंगर
कभी योग के कठिन आसन इन्हें भी डराते थे
एक बेहद दिलचस्प वाकया है। उनके गुरु ने उन्हें किसी प्रोग्राम में हनुमान आसन का प्रदर्शन करने के लिए कहा। इतने कठिन आसन का नाम सुनकर अयंगर घबरा गए। अयंगर ने बहाना बनाया कि उनकी पैंट टाइट है। इसलिए वो ये आसन नहीं कर पाएंगे। आखिर गुरु तो गुरु ही होता है। उनके गुरु ने उनकी पैंट दोनों तरफ से काट दी और कहा अब करो योग।
योगाचार्य बी.के.एस अयंगर
मैट्रिक में अंग्रेजी विषय में हुए थे फेल
अंग्रेजी भाषा में कई किताबें लिखने वाले बी.के.एस अयंगर मैट्रिक की परीक्षा में अंग्रेजी विषय में फेल हो गए थे। उन्हें बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़ी। लेकिन ये योग की ही ताकत थी कि आगे चलकर उन्होंने कई किताबें लिखीं। 'लाइट ऑन योगा' नाम से पहली किताब 1966 में लिखी जो बेस्ट सेलर बनी और दूसरी 'लाइट ऑन प्राणायाम' बेहद मशहूर हुई। इस किताब का अनुवाद 21 भाषाओं में हुआ।
योगाचार्य बी.के.एस अयंगर
कभी दो वक्त के खाने के लिए भी थे मोहताज
बी.के.एस. अयंगर बेहद गरीब परिवार में जन्मे थे। लेकिन अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के जरिए उन्होंने दुनियाभर में नाम कमाया। पुणे में उनके जानने वाले एक सिविल सर्जन ने उनके लिए डेक्कन जिमखाने में क्लास लेने के लिए प्रस्ताव रखा। इतना बड़ा मौका भला कैसे जाने देते सो अयंगर तुरंत राजी हो गए। लेकिन छह महीने बाद ही क्लासेज बंद हो गईं। अब उनके पास कमाई का स्थायी जरिया नहीं था। योग की कुछेक क्लासेज करके जैसे-तैसे जिंदगी गुजारी। कई बार ऐसा हुआ कि चाय और पानी पीकर पूरा दिन गुजारना पड़ा।
योगाचार्य बी.के.एस अयंगर
ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में दर्ज है 'अयंगर योगा'
ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में बाकायदा योग के एक प्रकार के रूप में 'अयंगर योगा' का नाम दर्ज है। हालांकि जब पहली बार अयंगर यूरोप गए थे तो वहां पर इमिग्रेंट अधिकारी के एक सवाल के जवाब में जब उन्होंने ये कहा कि उनके जीवनयापन का जरिया योग है तो उस अधिकारी ने ऐसी प्रतिक्रिया दी मानों उन्होंने दुनिया के किसी अजूबे का जिक्र कर दिया हो।
योगाचार्य बी.के.एस अयंगर
अच्छा स्वास्थ्य पाने की ललक में शुरू किया था योग
उनका जन्म 14 दिसंबर 1918 को हुआ था। उस वक्त इंफ्लुएंजा महामारी फैली हुई थी। ऐसे में बचपन में वो कई तरह के संक्रमण का शिकार हो गए। बचपन से लेकर किशोरावस्था तक वो इतने कमजोर थे कि उनकी लंबी आयु की उम्मीद किसी को नहीं थी।
योगाचार्य बी.के.एस अयंगर
योग को सही अर्थों में समझे और समझाया
योग संस्कृत के 'युज' शब्द से बना है। युज का हिंदी में अर्थ होता है जोड़ना या एकता। सही मायने में उन्होंने योग के एक सूत्र में पूरी दुनिया को पिरोया। पूंजीवादी विचारधारा वाले अमेरिका जैसे देश से लेकर वामपंथी विचारधारा वाले चीन जैसे देश में योग को पहुंचाया। जात-पात, धर्म, नस्ल, संस्कृति, भौगोलिक सीमाएं और भू-राजनीतिक सीमाओं को लांघकर उन्होंने भारत की प्राचीन विरासत योग को पूरी दुनिया में पहुंचाया।
योगाचार्य बी.के.एस अयंगर
जब बीसवीं सदी के महान वॉयलन वादक येहूदी मेनहुन बने उनके शिष्य
1954 में उनकी मुलाकात अपने एक शिष्य के जरिए बीसवीं सदी के महान वॉयलन वादक येहूदी मेनहुन से हुई। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने येहूदी को भारत में परफॉर्म करने के लिए बुलाया था। येहूदी की परफारमेंस से बाढ़ पीड़ितों के लिए फंड इकट्ठा किया जाना था। मेनहुन को योग गुरु की तलाश थी। मौके से अयंगर की मुलाकात उनसे हो गई। पहले मेनहुन ने योग गुरु अयंगर को पांच मिनट का वक्त देना तय किया, लेकिन यह मुलाकात कब 45 मिनट में बदल गई दोनों को पता ही नहीं चला। बाद में दोनों न केवल गहरे दोस्त बने बल्कि मेनहुन ने उन्हें अपना गुरु भी माना।
योगाचार्य बी.के.एस अयंगर
अयंगर योगा जब बन गया अभियान
पहला अयंगर योग सम्मेलन 1984 में सेन फ्रांसिस्को में हुआ था। उस समय दुनियाभर से लोग इसमें शामिल हुए थे। अयंगर योग को करने वाले और इसे मानने वाले लोग खुद को 'अयंगर योगा प्रैक्टिसनर' कहते हैं। योगाचार्य बी.के.एस. अयंगर ने कभी भी अपने योग का प्रचार किसी ऐड कंपनी के जरिए या किसी और माध्यम से नहीं किया। अयंगर योग को करने और मानने वाले लोग ही इस पद्धति के प्रचारक हैं।
योगाचार्य बी.के.एस अयंगर
मिले कई सम्मान
साल 2002 में बी.के.एस अयंगर को पद्मभूषण सम्मान मिला और 2014 में पद्मविभूषण से उन्हें नवाजा गया। साल 2004 में टाइम पत्रिका ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे ज्यादा प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया।