यहां की नदियां भी गुनगुनाती हैं गोपीनाथ बोरदोलोई की लोकप्रियता के गीत रहा... बरसों पहले इसी कस्बे से फूटी थी असम के विकास की राह। जननायक गोपीनाथ बोरदोलोई की अंगुली पकड़कर असम ने आधुनिकता की दहलीज पर कदम रखा। आधुनिक असम का रहगुजर एक छोटा सा कस्बा-रहा। गुवाहाटी से करीब 100 किमी दूर इसी जगह राज्य के महानायक गोपीनाथ बोरदोलोई का जन्म हुआ, बचपन बीता। भारत रत्न बोरदोलोई अब इस कस्बे के पर्याय बन चुके हैं। यहां का चप्पा-चप्पा आज भी उनकी ही बातें करता नजर आता है।
अगर किताबें और दस्तावेज बोरदोलोई के बारे में जानने-समझने की आपकी भूख नहीं मिटा पाते तो आपको पहले गुवाहाटी और फिर रहा तक का सफर तय करना होगा। गुवाहाटी से पूरब की ओर एक सड़क रहा तक जाती है। पूरी तरह हरियाली से आच्छादित सुंदर सा रहा कस्बा राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा है। गुवाहाटी से निकलने पर सड़क के एक तरफ कुछ दूर तक असम का इलाका है तो दूसरी तरफ मेघालय है।