तमिलनाडु के गांवों में दो चीजें आपको इफरात में मिलेंगी। एक धान के लहलहाते खेत और दूसरे केले व नारियल के ऊंचे लहराते पेड़। चावल यहां की आत्मा है। चावल और उससे बने दोसा, उत्तपम, इडली जैसे सारी दुनिया में लोकप्रिय व्यंजनों की जन्मभूमि भी यही है। ये सारे स्वादिष्ट व्यंजन आपको हरे ताजे केले के पत्ते पर नारियल की चटनी और सांबर के साथ परोसे मिलेंगे। तमिलनाडु के पांच सितारा होटल से लेकर सड़क किनारे के रेस्तरां तक, हर जगह।
भारत के अंतिम गवर्नर जनरल और 'गांधी के दक्षिणी सेनापति' चक्रवर्ती राजगोपालाचारी यानी सीआर के जन्मस्थान पर पहुंचने से पहले हमें इन्हीं धान के खेतों और नारियल के झूमते पेड़ों के बीच से गुजरना होता है। चेन्नई से बेंगलुरु की तरफ आते हुए मौसम सुहाना है और सड़क के दोनों तरफ खूब हरी पहाड़ियां हैं। मोबाइल का गूगल मैप 19वीं सदी के अंतिम दशकों में जन्मे राजाजी की जन्मभूमि तक ऐसे ले जा रहा है जैसे बगल में कोई लोकल गाइड बैठा हो। बेंगलुरु से 50 किलोमीटर हाईवे के किनारे दायीं तरफ एक बड़े से सिंहद्वार पर तमिल में कुछ लिखा है।
मैं तमिल ड्राइवर भास्करन को गाड़ी रोकने के लिए कहता हूं। सर इस गेट पर तमिल में राजाजी का नाम लिखा है। यानी हम सही रास्ते पर हैं। लेकिन गूगल का नक्शा बताता है कि राजाजी के गांव जाने के लिए आपको हरियाली व खेतों के बीच से निकल रही चौड़ी सड़क पर कोई 10 किलोमीटर और यात्रा करनी होगी। अगले दस मिनट में हम राजाजी के गांव थोरापल्ली पहुंच गए। अरे, यहां तो एक और सिंहद्वार है जिस पर तमिल में लिखा है-'ये राजाजी के घर का प्रवेश द्वार है।'
अब हम राजाजी के गांव थोरापल्ली की साफ सुथरी गलियों में हैं। लेकिन चौंकिए मत, गलियों के टाइल्स से इंटरलॉक किए रास्ते इतने चौड़े हैं कि छोटे ट्रक और ट्रैक्टर आराम से चले जाएं। इन गलियों के दोनों तरफ कुछ दक्षिण शैली में बने पुराने खपरैल के घर हैं और कुछ पक्के रिहायशी मकान। इनकी दीवारों पर राजनीतिक दलों के पुराने चुनावी सिंबलों व नारों की पेटिंग्स अब तक बनी हैं। खपरैल के घरों में चल रहे बड़े एलईडी टीवी और पक्के घरों के आगे खड़े ट्रैक्टर, कार यहां के किसानों की संपन्नता की कहानी कह रहे हैं।
गली के किनारे कहीं-कहीं दक्षिण शैली में नए बने वैष्णव मंदिर भी दिख जाते हैं। थोड़ा सा आगे बढ़िए तो लाल खपरैल के बने एक घर के आगे बोर्ड लगा है, जिस पर तमिल में लिखा है- मुद्रिग्यार राजाजी पिरणथाइल्लम यानी मूर्धन्य पंडित राजाजी का जन्मस्थान। घर की दलान के बाहर लोहे की मजबूत ग्रिल लगी है। पूरे घर का मूल रूप बरकरार रखते हुए तमिलनाडु सरकार ने 80' के दशक में ही राजाजी स्मारक बना कर एक केयरटेकर नियुक्त कर दिया था। खादी की सफेद कमीज पहने एक सज्जन दरवाजे पर स्वागत के लिए पहले से ही खड़े हैं। ये जरूर केयरटेकर बालूजी होंगे।