इस रिपोर्ट को देखने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पांच मार्च 2003 को एएसआई को विवादित स्थल की खुदाई करने का आदेश दिया था। यह खुदाई 12 मार्च से सात अगस्त तक की गई।
एएसआई ने 25 अगस्त 2003 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस खुदाई से संबंधित अपनी रिपोर्ट दाखिल की थी। जिसमें उसने कहा था कि विवादित ढांचे के नीचे नक्काशीदार ईंटों की विशाल संरचना, देवताओं की युगल खंडित मूर्तियां और नक्काशीदार वास्तुशिल्प, पत्तों के गुच्छे, दरवाजों के हिस्से, कमल की आकृति और पूजा स्थल जैसी कई चीजें मिली हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इसमें उत्तर की ओर निकला एक परनाला भी है, जिसे शिवलिंग से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके अलावा स्थल के नीचे 50 खंभों वाले एक ढांचे का आधार भी मिला है। एएसआई के अनुसार यह अवशेष उत्तर भारत के मंदिरों के जैसे हैं।
गुप्त, उत्तर गुप्त और कुषाण काल के मिले अवशेष
विवादित स्थल की खुदाई के दौरान एएसआई को गुप्त, उत्तर गुप्त काल और कुषाण काल के अवशेष मिले थे। टीम को खुदाई के दौरान गुप्त कालीन और कुषाण कालीन दीवारें मिली थीं। रिपोर्ट में यहां मिली विशाल संरचना को कुषाण कालीन बताया गया था। यहां शुंग काल की निर्मित एक चूना पत्थर की दीवार भी मिली थी।