वकील विनीत जिंदल ने भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ द्वारा कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ आपत्तिजनक वाले के एक बयान को आधार बनाकर उन पर न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही करने की गुहार लगाई थी।
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर अपनी सहमति देने से इनकार कर दिया है।
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वकील विनीत जिंदल ने भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ द्वारा कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ आपत्तिजनक वाले के एक बयान को आधार बनाकर उन पर न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही करने की गुहार लगाई थी।
जिंदल ने चंद्रशेखर के बयान को न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15 (1) (बी) के तहत कार्यवाही शुरू किए जाने के लिए अटॉर्नी जनरल की सहमति मांगी थी।
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अटॉर्नी जनरल ने जिंदल को दिए जवाबी पत्र में कहा, सुप्रीम कोर्ट के जजों पर अपमानजनक आरोप जरूर लगाए गए हैं लेकिन इस बयान से न तो न्यायपालिका के कामकाज पर कोई असर पड़ने वाला है और न ही ये बयान लोगों के मन में न्यायपालिका की अथॉरिटी को कम करते हैं। वे बयान जनता को उत्तेजित करने के लिए दिए गए हैं। अटॉर्नी जनरल ने कहा, मेरा मानना है कि शायद ही किसी व्यक्ति ने उस बयान को गंभीरता से लिया होगा।