बड़े दलों के अलग-अलग खम ठोकने के कारण उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुकोणीय मुकाबला होना तय है। हालांकि, मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ भाजपा और सपा के बीच माना जा रहा है। कांग्रेस और आप उपस्थिति दर्ज कराने के लिए हाथ पांव मार रही है तो बसपा आक्रामक तेवरों से दूर है। ऐसे में राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह अबूझ पहेली बना हुआ है। राममंदिर, किसान आंदोलन, कोरोना महामारी के प्रबंधन जैसे राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों के महाभारत में प्रधानमंत्री मोदी, सीएम योगी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत दिग्गज नेताओं के नेतृत्व की परीक्षा भी होगी।
बसपा पर उधेड़बुन
सपा के दांव-पेच
मुख्य विपक्षी दल की दिक्कतें
उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में कांग्रेस-आप
कांग्रेस की मुश्किलें
कांग्रेस ने 40 फीसदी सीटों पर महिलाओं को टिकट देने की घोषणा की है। प्रदेश में 160 जिताऊ महिला उम्मीदवार खोजने की चुनौती होगी। जमीनी स्तर पर पार्टी संगठन की मजबूती पर भी सवाल हंै।
सूबे में बदल गया वोटों का गुणा-भाग
मुकाबला बहुकोणीय होने से दलों को हासिल वोट प्रतिशत अहम भूमिका अदा करेगा। बीते आठ सालों में राज्य के सियासी समीकरण में बड़ा बदलाव आया है। पहले करीब तीस फीसदी वोट सरकार बनाने के लिए निर्णायक साबित होते रहे हैं। बसपा-सपा ने क्रमश: 2007 और 2012 में तीस फीसदी वोटों के सहारे ही बहुमत हासिल कर लिया था। हालांकि अब यह वोट प्रतिशत सत्ता की चाबी नहीं है। भाजपा ने बीते लोकसभा में 50 फीसदी तो बीते विधानसभा में करीब 40 फीसदी वोट हासिल किए थे।
आंदोलन के गढ़ से आगाज
चुनावों का आगाज किसान आंदोलन के गढ़ रहे पश्चिमी यूपी के जिलों से ही चुनावों की शुरुआत होने जा रही है। अंत पूर्वांचल से होगा। पहले चरण में पश्चिमी यूपी के गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर. मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, आगरा, अलीगढ़, शामली और मथुरा की कुल 58 सीटों पर 10 फरवरी को वोट डाले जाएंगे।