छत्तीसगढ़ विधानसभ चुनाव के नतीजे
छत्तीसगढ़ में किसानों की ऋण माफी समेत फसलों के उचित मूल्य के कांग्रेस के वादे का दांव सफल रहा। यहां भाजपा को राज्य की 90 में से 15 सीटें मिलीं जबकि कांग्रेस पहली बार दो तिहाई बहुमत से जीती। कांग्रेस ने 68 सीटों के साथ जीत का विजय पताका फहराया। इसी के साथ कांग्रेस की इस ऐतिहासिक जीत ने 15 साल से चल रहे रमन सिंह के शासन का अंत कर दिया है। वहीं, बीएसपी को 2 और जनता कांग्रेस को 5 सीटों पर जीत मिली है।
राज्य में मतदाताओं का गुस्सा इस कदर था कि रमन सिंह सरकार के पांच मंत्री ब्रजमोहन अग्रवाल, केदार कश्यप, महेश गगडा, दयालदास बघेल और अमर अग्रवाल चुनाव हार गए। राज्य में भाजपा की बड़ी हार का कारण अजित जोगी की जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ भी रही। पहली बार चुनाव में उतरी पार्टी को हालांकि खास कामयाबी तो नहीं मिली, लेकिन जोगी के अनुसार उनकी पार्टी भाजपा के वोट काटने में सफल रही।
तेलंगाना विधानसभा चुनाव के नतीजे
तेलंगाना में मुख्यमंत्री केसीआर का जादू मतदाताओं के सिर चढ़ कर बोला। राज्य की 119 में से 88 सीटों पर कब्जा कर सत्तारूढ़ टीआरएस ने सूबे में कांग्रेस गठबंधन की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इस चुनाव में कांग्रेस-तेलुगू देशम पार्टी गठबंधन को महज 22 सीटें मिली, जबकि भाजपा को एक ही सीट मिल पाई। इसके अलावा मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को छह सीटें मिलीं।
बता दें कि राज्य में जल्द चुनाव कराने के लिए केसीआर सरकार ने विधानसभा को भंग कर दिया था। हालांकि उनका यह दांव बेहद सफल साबित हुआ।
मिजोरम विधानसभा चुनाव के नतीजे
मिजोरम में हर 10 साल में सत्ता बदलने का इतिहास इस बार भी बरकरार रहा। विद्रोही से नेता बने जोरामथांगा के नेतृत्व में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने राज्य की 40 में से 26 सीटों पर जीत दर्ज सत्ता में जोरदार वापसी की है। कांग्रेस को जनता ने बुरी तरह नकार दिया और उसे मात्र 5 सीटों पर जीत नसीब हुई। मुख्यमंत्री लल थनहावला को दोनों सीटों पर बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही कांग्रेस पूर्वोत्तर में सभी राज्यों से बाहर हो गई है। वहीं, भाजपा ने एक सीट जीतकर राज्य में पहली बार खाता खोला, जबकि अन्य के खाते में 8 सीटें गईं।
बता दें कि इससे पहले एमएनएफ ने 1998 विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी और 21 विधायकों के साथ सरकार बनाई थी। इस दौरान जोरामथांगा पहली बार मुख्यमंत्री बने थे और अपना कार्यकाल पूरा किया था। उन्होंने साल 2003 के राज्य विधानसभा चुनाव में भी सत्ता बरकरार रखी और वह मुख्यमंत्री बने रहे।