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राजनीतिक संरक्षण में फलते-फूलते रहे आसाराम बापू

Wed, 25 Apr 2018 08:58 AM IST
बीबीसी, हिन्दी
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आसाराम बापू की किस्मत का फैसला जोधपुर की अदालत पर निर्भर है, मगर राजनीतिक रूप से आसाराम को काफी रसूखदार माना जाता रहा है। भारतीय जनता पार्टी हो या फिर कांग्रेस- आसाराम बापू के राजनीतिक शागिर्दों की लम्बी फेहरिस्त रही है। चाहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी हों या वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - हर कोई बापू का आशीर्वाद लेने उनके आश्रम जाते रहे हैं। लेकिन जब आसाराम बापू पर शिकंजा कसना शुरू हुआ तो लोगों ने उनसे दूरियां बना लीं।

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बदली हुई परिस्थितियों में कोई भी राजनेता उनके साथ नजर आना नहीं चाहता है। लेकिन उनके भक्तों की आस्था उनमें बनी रही है। उन पर जमीन हड़पने के मामले से लेकर आश्रम में दो बच्चों के शवों की बरामदगी के मामलों के बावजूद उनके भक्तों की श्रद्धा में कोई कमी नहीं आई और वो उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ लगातार प्रदर्शन करते आ रहे हैं।

आसाराम का रसूख

हालांकि जोधपुर में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है, लेकिन दिल्ली के जंतर मंतर पर लगातार धरना देने वाले उनके भक्त जोधपुर रवाना हो चुके हैं। जानकारों का मानना है कि मूलतः व्यापारी वर्ग ही ऐसा है जो उनकी रिहाई का विरोध कर रहा है। ऐसे आरोप हैं कि आसाराम बापू ने काफी पैसा व्यापारियों को दिया था। जेल से रिहाई की सूरत में उन्हें उस पैसे का हिसाब देना पड़ेगा। बीबीसी की गुजराती सेवा के सम्पादक अंकुर जैन कहते हैं कि उन्होंने एक दौर ऐसा भी देखा है जब किसी अखबार में आसाराम बापू के खिलाफ कोई खबर छपती थी तो उनके समर्थक हफ्ते-हफ्ते भर तक उस पत्रिका या अखबार के दफ्तर के सामने धरने पर बैठ जाया करते थे।
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आसाराम के जेल जाने के बाद परिस्थितियां बदल चुकी हैं। कई नेता और कार्यकर्ता उनके साथ नजर नहीं आना चाहते। सामाजिक कार्यकर्ता मनीषी जानी ने बीबीसी से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि सबकुछ के बावजूद आसाराम बापू को एक तरह का राजनीतिक संरक्षण भी हासिल है। उन्होंने विधानसभा का हवाला देते हुए कहा कि नौबत यहां तक आ गई कि आसाराम बापू के मुद्दे पर विधानसभा में इतना जमकर हंगामा हुआ जिसमें माइक तक उखाड़े गए। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी भी उनके आश्रम जाते रहे थे। इससे आसाराम बापू को लगा कि कानून के हाथ उन तक नहीं पहुंच सकते हैं।

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राजनीतिक संरक्षण

लेकिन नरेंद्र मोदी ने जल्द ही बापू से दूरियां बना लीं और आसाराम बापू पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया। जो राजनेता उनके साथ नजर आना चाहते थे उन्होंने आसाराम बापू से दूरियां बनानी शुरू कर दीं। जब आसाराम बापू के आश्रम से दो शव बरामद हुए तो माहौल ही उल्टा हो गया और गुजरात में नरेंद्र मोदी की तत्कालीन सरकार ने उनके आश्रमों पर छापेमारी शुरू कर दी। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता मनीष दोशी को लगता है कि इन तमाम आरोपों के बावजूद आसाराम बापू को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। दोशी का आरोप है हाल ही में संपन्न विधानसभा के चुनावों में इतना तो पता चल ही गया कि भारतीय जनता पार्टी का जनाधार खिसक रहा है।

वो कहते हैं, "भाजपा जानती है कि बापू के आने से जनाधार बढ़ेगा। ये सर्वविदित है कि आसाराम ने इतनी संपत्ति और जमीन सरकार के संरक्षण से ही हासिल की है कि अब अगर वो छूट कर आते हैं तो वो उन्हीं के लिए काम करेंगे जो उनकी शरण में जाते रहे हैं।" कांग्रेस को लगता है कि आसाराम बापू अगर जेल से बाहर आते हैं तो राजनीतिक मित्रों के लिए ही काम करेंगे। "भाजपा को इस वक्त उनकी बहुत जरूरत है क्योंकि उसका जनाधार खिसक रहा है और आसाराम बापू के समर्थकों या भक्तों की तादाद काफी है।

हालांकि आसाराम बापू के भक्तों को लगता है कि उनके गुरु को झूठे आरोपों में बंद किया गया है और उन्हें एक सोची-समझी साजिश के तहत जेल भिजवाया गया है। वो यह भी मानते हैं कि आसाराम बापू पर लगाया गया बलात्कार का आरोप भी गलत हैं। फिलहाल जोधपुर के प्रशासन ने एहतियाती कदम पहले से ही उठा लिए हैं ताकि आसाराम बापू के समर्थक हिंसा पर उतारू ना हो जाएं। बलात्कार की पीड़ित के घर पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
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