लेकिन नरेंद्र मोदी ने जल्द ही बापू से दूरियां बना लीं और आसाराम बापू पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया। जो राजनेता उनके साथ नजर आना चाहते थे उन्होंने आसाराम बापू से दूरियां बनानी शुरू कर दीं। जब आसाराम बापू के आश्रम से दो शव बरामद हुए तो माहौल ही उल्टा हो गया और गुजरात में नरेंद्र मोदी की तत्कालीन सरकार ने उनके आश्रमों पर छापेमारी शुरू कर दी। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता मनीष दोशी को लगता है कि इन तमाम आरोपों के बावजूद आसाराम बापू को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। दोशी का आरोप है हाल ही में संपन्न विधानसभा के चुनावों में इतना तो पता चल ही गया कि भारतीय जनता पार्टी का जनाधार खिसक रहा है।
वो कहते हैं, "भाजपा जानती है कि बापू के आने से जनाधार बढ़ेगा। ये सर्वविदित है कि आसाराम ने इतनी संपत्ति और जमीन सरकार के संरक्षण से ही हासिल की है कि अब अगर वो छूट कर आते हैं तो वो उन्हीं के लिए काम करेंगे जो उनकी शरण में जाते रहे हैं।" कांग्रेस को लगता है कि आसाराम बापू अगर जेल से बाहर आते हैं तो राजनीतिक मित्रों के लिए ही काम करेंगे। "भाजपा को इस वक्त उनकी बहुत जरूरत है क्योंकि उसका जनाधार खिसक रहा है और आसाराम बापू के समर्थकों या भक्तों की तादाद काफी है।
हालांकि आसाराम बापू के भक्तों को लगता है कि उनके गुरु को झूठे आरोपों में बंद किया गया है और उन्हें एक सोची-समझी साजिश के तहत जेल भिजवाया गया है। वो यह भी मानते हैं कि आसाराम बापू पर लगाया गया बलात्कार का आरोप भी गलत हैं। फिलहाल जोधपुर के प्रशासन ने एहतियाती कदम पहले से ही उठा लिए हैं ताकि आसाराम बापू के समर्थक हिंसा पर उतारू ना हो जाएं। बलात्कार की पीड़ित के घर पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।