सुदूर चौकी क्षेत्रों में अब रसद की आपूर्ति के लिए सेना नागरिक विमानन हेलीकॉप्टरों का उपयोग करेगी। इसके लिए सेना ने नागरिक विमानन सेवा प्रदाताओं के साथ अनुबंध किया है। इसके तहत जम्मू क्षेत्र में 16 और कश्मीर-लद्दाख क्षेत्र में 28 सुदूर चौकियों तक सर्दियों और बर्फबारी के दौरान रसद सेवाओं की आपूर्ति की जाएगी। सेना के अधिकारियों के मुताबिक इस पहल से एक ओर जहां लागत कम होगी। साथ ही सेना को रणनीतिक लाभ भी मिलेगा।
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि सुदूर चौकियों तक रसद सहायता बढ़ाने के लिए यह अनुबंध किया गया है। यह अनुबंध उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सेना की शीतकालीन कट-ऑफ चौकियों पर हेलीकॉप्टर सहायता प्रदान करने के लिए नागरिक-सैन्य संलयन और पीएम गति शक्ति पहल का लाभ उठाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता का उदाहरण है। इसका सबसे खास पहलू यह है कि भारतीय सेना पनी विमानन या भारतीय वायु सेना की संपत्तियों के बजाय नागरिक उड्डयन हेलीकॉप्टरों का उपयोग करेगी।
सेना के अधिकारियों के मुताबिक इस पहल से एक ओर जहां लागत में कमी आएगी। वहीं दूसरी ओर युद्ध या आपातकालीन स्थिति के लिए सेना के हेलीकॉप्टरों के जीवन को बचाया जा सकेगा। नियमित रसद कार्यों के लिए नागरिक उड्डयन का लाभ उठाने से सेना का लड़ाकू विमानन बेड़ा अधिक मिशन-महत्वपूर्ण अभियानों के लिए तैयार रह पाएगा।
बताया गया कि एक साल के लिए हुए अनुबंध के तहत जम्मू क्षेत्र में 16 दूरस्थ चौकियों पर पूरे साल और जबकि कश्मीर और लद्दाख में 28 चौकियों को अगले वर्ष 150 दिनों तक नागरिक विमानन सेवाओं के जरिये रसद आपूर्ति का लाभ मिलेगा। इस पहल से सामने आएगा कि कैसे भारतीय सेना सर्दियों के महीनों के दौरान बर्फबारी के वक्त उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अपनी महत्वपूर्ण स्थिति बनाए रखती है। सेना की इस पहल से सैनिकों को उचित समय पर रसद की आपूर्ति हो सकेगी।
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