भारत में पहली बार प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत नदियों में डॉल्फिन की जनसंख्या का आकलन लगाने का अभ्यास किया गया। सोमवार को अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदी प्रणालियों में नदी डॉल्फिन की पहली जनसंख्या का आकलन किया गया है और इसका निष्कर्ष जल्द ही जारी किए जाएंगे। बात अगर प्रसिद्ध गंगा नदी डॉल्फिन की करें तो ये गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना नदी प्रणाली और भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल में फैली इनकी सहायक नदियों में पाई जाती है। वहीं गंगा नदी डॉल्फिन की करीबी प्रजाती सिंधु नदी डॉल्फिन की छोटी आबादी भारत में सिंधु नदी प्रणाली में पाई जाती है।
महासागरों में डॉल्फिन की सुरक्षा पर ध्यान
प्रोजेक्ट डॉल्फिन के उद्देश्य की बात करें तो इस परियोजना का उद्देश्य मुख्य रूप से जनसंख्या का पता लगाने के साथ-साथ देश के महासागरों में डॉल्फिन की सुरक्षा करना भी है। डॉल्फिन की उपस्थिति एक स्वस्थ नदी प्रणाली का संकेत देती है क्योंकि उन्हें जीवित रहने के लिए स्वच्छ, बहते पानी की आवश्यकता होती है। उनकी आबादी वैज्ञानिकों को एक नदी के समग्र स्वास्थ्य का आकलन करने में मदद करती है। बता दें कि भारत ने 2020 में मीठे पानी की नदियों और तटीय जल दोनों में डॉल्फिन की सुरक्षा के लिए एक संरक्षण पहल, प्रोजेक्ट डॉल्फिन की शुरुआत की थी। जबकि इसका प्राथमिक ध्यान भारत की नदी प्रणालियों के मूल निवासी गंगा नदी डॉल्फिन पर है।
जल्द सामने आएंगे निष्कर्ष
प्रोजेक्ट डॉल्फिन के बारे में जानकारी देते हुए अधिकरी ने कहा कि प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत, हमने नदी डॉल्फिन का आकलन पूरा कर लिया है। दो वर्षों में किए गए सर्वेक्षण में गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदियों के 8,000 किलोमीटर को कवर किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए समुद्री डॉल्फिन की आबादी का आकलन करने की भी योजना बना रही है। हालांकि इस आकलन के परिणाम जल्द ही जारी कर दिए जाएंगे।