सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सेना प्रमुखों की कॉन्फ्रेंस (आईपीएसीसी) के समापन सत्र में बोल रहे थे। भारतीय सेना ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक आम रणनीति विकसित करने के लिए दो दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी की। इसमें 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिनमें करीब 15 सेनाओं के प्रमुख भी शामिल थे।
सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता अमूर्त आदर्श नहीं हैं और ये वह नींव हैं जिस पर लाखों लोगों के सपने और आकांक्षाएं टिकी हैं। भारतीय सेना इन आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सामने आने वाली बहुमुखी चुनौतियों का सामना करने के लिए समान विचारधारा वाले देशों के मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में 'एकता की कोशिश' की अवधारणा को अपनाने की अपील की।
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सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सेना प्रमुखों की कॉन्फ्रेंस (आईपीएसीसी) के समापन सत्र में बोल रहे थे। भारतीय सेना ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक आम रणनीति विकसित करने के लिए दो दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी की। इसमें 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिनमें करीब 15 सेनाओं के प्रमुख भी शामिल थे। सेनाध्यक्ष ने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर हासिल की गई आम समझ को अब भविष्य में हमारी समग्र कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
एकजुटता की इसी भावना के तहत मैं हममें से प्रत्येक से ‘एकता का प्रयास’ की अवधारणा को अपने मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में अपनाने का आग्रह करता हूं। चुनौतियों के समाधान के लिए रचनात्मकता, नवीनता, लचीलेपन और समावेशी सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान आप सभी ने जिस विश्वास को बढ़ावा दिया और निर्माण में मदद की, उसे मैं स्वीकार और उसकी सराहना करना चाहता हूं। हमने दावा किया है कि हमारे भौगोलिक अलगाव के बावजूद, हम शांति और स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में एकजुट हैं।