केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने 2014 से पहले भारत आए मतुआ समुदाय के सदस्यों से आग्रह किया कि कि वे सीएए के तहत नागरिकता के आवेदन करें, भले ही उनके पास पहले से ही मतदान का अधिकार हो। ठाकुर पश्चिम की बनगांव लोकसभा सीट से दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं।
शांतनु ठाकुर अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह खुद नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करेंगे। हालांकि, वह पहले से ही देश के निवासी हैं।
उन्होंने कहा, सीएए के तहत नए सिरे से नागरिकता के लिए आवेदन करने से आप स्थायी निवास प्रमाण पत्र सहित सभी लाभ हासिल कर सकेंगे, जो पासपोर्ट और वीजा के लिए भी जरूरी हैं। हालांकि, मैं यहीं पैदा हुआ हूं और मेरे दादा के यहां आने के बाद निवास का सबूत था। फिर भी मैं आवेदन करूंगा।
ठाकुर 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद से सीएए के एक मजबूत समर्थक रहे हैं। वह पहले भी जोर देकर कहते रहे हैं कि संशोधिक नागरिकता कानून 2024 के आम चुनावों से पहले लागू किया जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस और अन्य दल भाजपा पर सीएए को विभाजनकारी रणनीति के लिए इस्तेमाल करने, सैकड़ों -हजारों वैध नागरिकों को शिविरों में भेजने और चुनाव से पहले समाज का ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाते रहे हैं। ठाकुर ने हाल ही में सीएए के तहत आवेदन करने के अपने इरादे का एलान किया था।
टीएमसी के प्रवक्ता शांतनु सेन ने भाजपा पर मतुआ और अन्य प्रवासी हिंदुओं को गुमरान करने का आरोप लगाया, जो पहले से ही देश के नागरिक हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने हिंदू वोट को ध्यान में रखते हुए आम चुनाव से ठीक पहले सीएए को अधिसूचित किया। उन्होंने कहा, अगर शांतनु ठाकुर पहले से ही नागरिक हैं, तो उन्हें सीएए के तहत एक बार फिर आवेदन करने की क्या जरूरत है? क्या वह कुछ छिपा रहे हैं? क्या (प्रधानमंत्री) नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में किसी ऐसे व्यक्ति को शामिल किया जो देश का नागरिक नहीं था?
ठाकुर ने 2019 के आम चुनाव में टीएमसी की ममताबाला ठाकुर को हराया था। वह मतुआ समुदाय के एक प्रभावशाली नेता हैं। 2019 के चुनाव में सीएए और एनआरसी मुख्य चुनावी मुद्दे थे।