ओला उबर समेत अन्य एप आधारित टैक्सी एग्रीगेटर्स को सुप्रीम कोर्ट ने लाइसेंस के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया था। वहीं इसको लेकर एक अधिकारी ने गुरुवार को जानकारी दी कि महाराष्ट्र में ओला और उबर सहित चार एप-आधारित टैक्सी एग्रीगेटर्स केंद्र सरकार के मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 2020 के कुछ प्रावधानों का पालन करने में विफल रहे हैं जिसके बाद मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने लाइसेंस जारी करने पर राज्य सरकार से मार्गदर्शन लेने का फैसला किया।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि मौजूदा समय में, सरकार इन ऑपरेटरों द्वारा उल्लंघन के मामले में प्रभावी ढंग से कार्रवाई नहीं कर सकती है लेकिन लाइसेंस से स्थिति को बदला जा सकता है। शीर्ष अदालत ने एप-आधारित टैक्सी एग्रीगेटर्स को छह मार्च तक लाइसेंस के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अगर वह महाराष्ट्र में अपना परिचालन जारी रखना चाहते हैं तो लाइसेंस के लिए आवेदन करें।
अधिकारी ने कहा कि उबर इंडिया सिस्टम लिमिटेड और एएनआई टेक्नोलॉजीज लिमिटेड जो उबर और ओला एप-आधारित सेवाएं संचालित करते हैं। अधिकारी ने कहा कि एमएमआरटीए ने उन्हें इस शर्त पर अस्थायी लाइसेंस दिया था कि उन्हें मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 2020 का पालन करना होगा।
आगे बताया कि इन दो प्रमुख एग्रीगेटर्स के अलावा, दो अन्य कंपनियों, कैब-एज इंफ्रा टेक प्राइवेट लिमिटेड और मीडिया माइल्स प्राइवेट लिमिटेड ने महानगर के मध्य भाग में वडाला आरटीओ और पड़ोसी ठाणे आरटीओ कार्यालय में एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए आवेदन किया था।
आरटीओ अधिकारियों के अनुसार, एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए आवेदन प्राप्त होने पर, टीमों को यह जांचने के लिए नियुक्त किया गया था कि क्या ये कंपनियां मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 2020 के प्रावधानों का अनुपालन कर रही हैं, लेकिन चार आवेदकों में से कोई भी उन्हें पूरा करते हुए नहीं पाया गया।