भारतीय वायुसेना में अपाचे (AH-64E) हेलीकॉप्टर को 'हवा में टैंक' या 'टैंक किलर' भी कहा जाता है। अपनी बेहतरीन मारक क्षमता के लिए प्रसिद्ध अत्याधुनिक अपाचे हेलीकॉप्टर जब से भारतीय वायुसेना में शामिल हुए हैं, उसके बाद से भारतीय सेना की मारक क्षमता में जबरदस्त इजाफा हुआ है। लेकिन जब पिछले हफ्ते लद्दाख में एलएसी पर ऑपरेशनल सॉर्टी के दौरान तकनीकी समस्या के चलते एक अपाचे हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग करने की खबर आई, तो रक्षा हल्कों में सनसनी फैल गई। इसकी वजह रही कि तकरीबन चार दशकों से बोइंग निर्मित एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर के लिए पिछले डेढ़ माह मुश्किल भरे साबित हुए हैं। डेढ़ माह में अभी तक दुनियाभर में पांच अपाचे हेलीकॉप्टरों में तकनीकी समस्या के चलते इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी है।
कुछ अपाचे हेलीकॉप्टर लद्दाख में तैनात
रक्षा सूत्रों का कहना है कि अपाचे हेलीकॉप्टर भारतीय वायुसेना के अटैक हेलीकॉप्टर्स के बेड़े की रीढ़ हैं। लद्दाख में ये चीनी आंखों को आसानी से धोखा दे देते हैं। ये हेलीकॉप्टर दिन-रात और किसी भी मौसम में ऑपरेशन को अंजाम दे सकते हैं। इन्हें इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इन्हें रडार पर पकड़ना मुश्किल हो सकता है। ये हवा में और जमीन पर भी मार कर सकते हैं। काउंटर ऑपरेंशस में इनका कोई जोड़ नहीं है। भारतीय वायुसेना के अलावा अमेरिकी वायुसेना इन्हें बेहद भरोसेमंद मानती है, ट्रायल के दौरान भारतीय वायुसेना इनकी क्षमताओं की मुरीद हो गई, जिसके बाद 2015 में 14,910 करोड़ रुपये की कीमत में 22 अपाचे खरीदने का फैसला हुआ। वह बताते हैं कि 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सैन्य गतिरोध शुरू होने के बाद से कुछ अपाचे हेलीकॉप्टर लद्दाख में तैनात हैं। तीन अप्रैल को नियमित उड़ान पर निकले भारतीय वायु सेना के जिस अपाचे हेलीकॉप्टर को खारदुंग-ला के पास लगभग 12,000 से 18000 फीट की ऊंचाई पर एक जगह पर आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी, वह उसी बेड़े का हिस्सा है। हालांकि रक्षा सूत्रों ने उसकी तकनीकी समस्या के बारे में तो नहीं बताया, लेकिन वे इसकी रिपेयरिंग को लेकर चिंतित जरूर दिखे। उन्होंने बताया कि जिस जगह पर इसकी इमरजेंसी लैंडिंग हुई, वहां पहुंचना आसान नहीं है, जिससे उसकी मरम्मत में लंबा वक्त लग सकता है और जिस तरह से चीन के साथ सीमा पर तनाव है, वायु सेना इसे हल्के में नहीं ले सकती है।
हाई एल्टीट्यूड पर रिपेयरिंग मुश्किल
एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर (रिटायर्ड) ने अमर उजाला को बताया कि वे उसकी तकनीकी समस्या के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता सकते, क्योंकि वायु सेना ने पहले ही कोर्ट ऑफ इंक्वॉयरी के आदेश जारी कर दिए हैं। लेकिन जिस जगह पर अपाचे ने इमरजेंसी लैंडिंग की थी, वह बर्फ से घिरा इलाका है। ऐसे में उसके ठीक होने में लंबा वक्त लग सकता है। वह बताते हैं कि पहले ये जानना जरूरी है कि उसकी स्थिति कैसी है। क्या वह फिर से उड़ने की हालत में है। क्या उसकी मौके पर ही मरम्मत हो सकती है, अगर नहीं है, तो उसे रिपेयरिंग के लिए नजदीकी बेस पर ले जाना पड़ सकता है। वहीं अगर वह उड़ान भरने की हालत में नहीं होगा, तो उसके पहले पुर्जों को अलग-अलग किया जाएगा, उन्हें नीचे लाया जाया जाएगा। लेकिन ये इतना आसान नहीं है। इसके लिए एक्सपर्ट टीमों को हाई एल्टीट्यूड जगह पर भेजना पड़ेगा, जो इतना आसान नहीं है। हालांकि जब उसकी इमरजेंसी लैंडिंग हुई थी, तो दोनों पायलट ने अचानक 'लॉस ऑफ पावर' की शिकायत की थी। वहीं अपाचे के क्षतिग्रस्त हिस्सों को ढूंढ लिया गया है।
चिनूक हेलीकॉप्टर एयरलिफ्ट करने का विकल्प
एवीएम मनमोहन बहादुर कहते हैं कि इसके अलावा दूसरा विकल्प भी है। अपाचे के न उड़ने की स्थिति में उसे बड़े हेवी लिफ्ट चिनूक हेलीकॉप्टर से 'अंडर-स्लिंग' ऑपरेशन में वापस लाया जाए। लेकिन इसके लिए देखना होगा कि अपाचे का अंडर स्लिंग लोड कितना है। वहीं क्या वह अपाचे के वजन के साथ हाई एल्टीट्यूड में उड़ान भर सकता है, ये देखना बेहद जरूरी होता है। अगर चिनूक पूरे अपाचे को एयरलिफ्ट कर नजदीकी बेस तक लाने में नाकामयाब रहता है, तो अपाचे के खराब हिस्से को एयरलिफ्ट किया जा सकता है, उसे रिपेयर करके फिर से वापस लगाया जा सकता है।
जोधपुर में पहला अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन
11 मई 2019 को पहला अपाचे हेलिकॉप्टर मिला, जिसके बाद सितंबर 2019 में 9 अपाचे पाकिस्तान सीमा के पास मौजूद इंडिय एयरफोर्स के पठानकोट एयरबेस पर तैनात किए गये। भारतीय सेना ने भी साल 2020 में छह और अपाचे हेलीकॉप्टर का लड़ाकू का ऑर्डर बोइंग को दिया था, जिनकी डिलीवरी इस साल जून तक की जा सकती है। जोधपुर में पहला अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन स्थापित किया गया। यह स्क्वाड्रन पश्चिमी रेगिस्तानी क्षेत्र में अपनी लड़ाकू क्षमताओं में वृद्धि करेगा। वहीं इस साल आने वाले बोइंग के छह अपाचे राजस्थान में तैनात होने वाले हैं।
ये हैं अपाचे की खूबियां
AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर में जनरल इलेक्ट्रिक के 2 टी700-जीई-701 टर्बोशिफ्ट इंजन लगे हैं, जो इसे 1409 किलोवॉट की पावर देते हैं। इसकी अधिकतम रफ्तार 293 किलोमीटर प्रतिघंटा है। इसे उड़ाने के लिए दो पायलट की जरूरत होती है। इसकी लंबाई 58.2 फीट और ऊंचाई 12.8 फीट है। बिना पेलोड के इसका वजन 5165 किलोग्राम होता है। उड़ान के समय यह 10,433 किलोग्राम वजन उठा कर ले जा सकता है। इसकी खूबियों की बात करें, तो इस हेलीकॉप्टर के साथ ड्रोंस भी उड़ाए जा सकते हैं। यानी एक हेलीकॉप्टर से कई ड्रोंस को कंट्रोल करके उनसे दुश्मन के इलाके को तबाह किया जा सकता है। इसमें 114 हेलफायर और स्टिंगर मिसाइलों के साथ-साथ हाइड्रा रॉकेट भी लगाए जा सकते हैं। हेलीकॉप्टर में 1,200 राउंड वाली 30 एमएम की चेन गन भी है। इसमें नाइटविजन सिस्टम के लिए नोजमाउंटेड सेंसर सूट है, जो इसकी क्षमता को और बढ़ाता है।
अभी तक ये अपाचे हुए दुर्घटनाग्रस्त
13 फरवरी को, एक ऊथा नेशनल गार्ड अपाचे दुर्घटनाग्रस्त हो गया, हालांकि दोनों पायलट इस दुर्घटना में बच गए। उसके बाद 23 फरवरी को, मिसिसिपी नेशनल गार्ड अपाचे हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें दोनों पायलटों की जान चली गई। इसके बाद 25 मार्च को जॉइंट बेस लुईस-मैककॉर्ड, वॉश में एक और अपाचे दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें 16वीं कॉम्बैट एविएशन ब्रिगेड का AH-64E संस्करण एक नियमित प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसके परिणामस्वरूप उसमें सवार दो पायलट घायल हो गए। उसके बाद 26 मार्च को फोर्ट कार्सन, कोलोराडो के पास चौथी कॉम्बैट एविएशन ब्रिगेड की चौथी इन्फैंट्री डिवीजन का एक एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर एक नियमित प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अमेरिकी सेना के मुताबिक हेलीकॉप्टर में सवार दो पायलटों को मामूली चोटें आईं और उन्हें तुरंत बेस अस्पताल ले जाया गया। वर्तमान में, 2400 अपाचे हेलीकॉप्टर बनाए जा चुके हैं, जिनमें लगभग 700 अपाचे हेलीकॉप्टर अमेरिकी सेना में काम कर रहे हैं। अब तक दुनिया में एक दर्जन से ज्यादा देश इस हेलीकॉप्टर का उपयोग कर रहे हैं।