गौरतलब है कि 15 नए कैबिनेट मंत्रियों में छठवें नंबर पर शपथ लेने वाले अश्विनी वैष्णव अब किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। करीब दो साल पहले उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में संसद में कदम रखा था और अब कैबिनेट में अपनी पैठ कायम कर ली है। भाजपा के सूत्र बताते हैं कि तकनीक में उस्ताद 50 वर्षीय अश्विनी वैष्णव टीम मोदी के ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों में अपनी दक्षता की वजह से मौका मिला। बताया जाता है कि कोरोना महामारी के दौर में कई नीतियों के निर्धारण में उनकी भी अहम भूमिका रही।
गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में अश्विनी वैष्णव उपसचिव रह चुके हैं। उस दौरान उन्होंने पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल को तैयार करने में विशेष योगदान दिया था। वहीं, जब वाजपेयी ने प्रधानमंत्री कार्यालय छोड़ा तो अश्विनी वैष्णव ने उनके निजी सचिव की भूमिका निभाई।
जानकारी के मुताबिक, अश्विनी राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं। 1999 में सुपर साइक्लोन के दौरान वह अपने सटीक फैसलों की वजह से सुर्खियों में छा गए थे। दरअसल, उस वक्त अश्विनी युवा आईएएस थे, जिन्होंने अमेरिकी नौसेना की वेबसाइट के माध्यम से तूफान पर नजर रखी और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को वक्त पर जानकारी मुहैया कराते रहे। अश्विनी वैष्णव की शैक्षिक योग्यता उनकी क्षमता की जानकारी खुद-ब-खुद देती है। दरअसल, वह जोधपुर विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार में गोल्ड मेडलिस्ट हैं। इसके अलावा उन्होंने कानपुर आईआईटी से औद्योगिक प्रबंधन में एमटेक और व्हार्टन से वित्त और रणनीति में एमबीए किया है।
बता दें कि अश्विनी वैष्णव ने सिविल सर्विस से ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। इसके बाद उन्होंने दक्षिण एशिया में जीई ट्रांसपोर्टेशन कंपनी में बतौर प्रबंधक निदेशक अपनी सेवाएं दीं। साथ ही, सीमेंस कंपनी के अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर स्ट्रैटजी विभाग के प्रमुख की भूमिका भी निभाई। वहीं, 2017 के दौरान उन्होंने अन्य उद्यमियों के साथ मिलकर एक स्टार्टअप शुरू किया। इसके तहत ओडिशा में आयरन ऑक्साइड पेलेट बनाने वाली एक कंपनी का अधिग्रहण किया।
1994 बैच के साथी आईएएस अफसर बताते हैं कि अश्विनी वैष्णव बेहद शानदार अधिकारी थे, जो हमेशा जमीन से जुड़े रहे। उनके साथी और ओडिशा आवास एवं शहरी विकास सचिव जी मथी वथानन बताते हैं कि अश्विनी बेहद सतर्क रहने वाले व्यक्ति हैं। वह हर वक्त जोश में नजर आते हैं और अपने साथियों को भी उत्साहित करते रहते हैं।
गौरतलब है कि करीब दो साल पहले राज्यसभा में अश्विनी वैष्णव की एंट्री बेहद नाटकीय अंदाज में हुई थी, जिससे उनकी अहमियत का पता चलता है। दरअसल, उस दौरान मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उन्हें बीजू जनता दल का प्रत्याशी घोषित किया, लेकिन बाद में भाजपा ने जून 2019 के दौरान उच्च सदन के उम्मीदवार के रूप में उनका समर्थन कर दिया। बता दें कि उस वक्त राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी अपने एक सदस्य को उच्च सदन भेज सकती थी। ऐसे में बीजद ने राज्यसभा की सीट अश्विनी वैष्णव के नाम कर दी।