भारत और रूस के बीच बढ़ते घनिष्ठ संबंधों के बीच, भारत ने रूस से एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति में तेजी लाने को कहा है। वहीं रूस ने भारत को बताया कि यूक्रेन के साथ चल रहे संघर्ष के कारण वह एस-400 के चौथे और पांचवें स्क्वाड्रन की आपूर्ति क्रमश: मार्च 2026 और अक्तूबर 2026 में कर पाने में समर्थ होगा।
2019 में भारत और रूस ने की थी डील
भारत और रूस ने साल 2019 में 400 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य को भेदने की क्षमता वाली अत्यधिक सक्षम वायु रक्षा प्रणाली के पांच स्क्वाड्रन खरीदने के लिए एक समझौता किया था। रक्षा अधिकारियों ने बताया कि भारत ने हाल ही में हुई वार्ता के दौरान रूसी पक्ष से अनुरोध किया है कि वह वायुसेना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आपूर्ति में तेजी लाए और आपूर्ति को समय से पहले पूरा करने का प्रयास करें।
2024 तक होनी थी S-400 के दो स्क्वाड्रनों की आपूर्ति
जिसके बाद रूसी पक्ष ने भारत के इस आग्रह पर विचार करने का आश्वासन दिया है। रूस ने पहले ही इनमें से तीन वायु रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति कर दी। इन्हें चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर क्रियाशील और तैनात किया जा चुका है। शेष दो स्क्वाड्रनों की आपूर्ति 2024 तक होने की उम्मीद थी लेकिन रूस के खुद के मुद्दों और यूक्रेन के साथ युद्ध के कारण एस-400 की आपूर्ति में देरी हुई है।
भारत ने अहम इलाकों में तैनात किए S-400
भारत ने इन एस-400 को उन क्षेत्रों में तैनात किया है, जहां से वह दुश्मन के लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और यहां तक कि बैलिस्टिक मिसाइलों की तरफ से किसी भी हवाई घुसपैठ से निपट सकता है। वहीं भारतीय वायु सेना का मानना है कि एस-400 हमारे लिए गेम चेंजर साबित होगा। भारतीय वायु सेना ने हाल ही में स्वदेशी एमआर-एसएएम और आकाश मिसाइल सिस्टम के साथ-साथ इजरायली स्पाइडर क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम हासिल किए हैं।
वायु सेना ने अपनी वायु रक्षा क्षमताओं में किया सुधार
भारतीय वायु सेना ने हाल के सालों में अपनी वायु रक्षा क्षमताओं में काफी सुधार किया है। भारतीय वायु सेना ने अब अपने स्वयं के प्रोजेक्ट 'कुशा' पर काम करना शुरू कर दिया है, जो उसे लंबी दूरी पर दुश्मन के प्लेटफार्मों को नष्ट करने के लिए डीआरडीओ की तरफ से विकसित एक स्वदेशी प्रणाली रखने की अनुमति देगा। चीनी सेना की तरफ से वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार बड़े पैमाने पर वायु रक्षा प्रणालियों को तैनात किया गया है, जबकि भारत ने भी वहां किसी भी दुश्मन के दुस्साहस का मुकाबला करने के लिए अपनी प्रणाली तैनात की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस हफ्ते के शुरुआत में मॉस्को का दौरा किया था और उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक की थी, जिसके बाद दोनों देशों ने कई हथियार प्रणालियों के उत्पादन और रख-रखाव में अपने सैन्य संयुक्त उपक्रमों को बढ़ाने का भी फैसला लिया है।