पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने जाते-जाते मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए देश के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जाहिर की थी। अंसारी ने आगे कहा था कि लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा बेहद जरूरी है।
गुरुवार को अपने कार्यकाल के अंतिम दिन विदाई समारोह में दिए गए वक्तव्य में उन्होंने कहा था कि मेरा कार्यकाल हॉकी मैच की तरह रहा, जिसमें मेरी भूमिका एक रेफरी की तरह रही है। हालांकि इससे पहले भी अपने बयान में उन्होंने अल्पसंख्यकों की असुरक्षा की भावना को लेकर चिंता जाहिर की है।
दरअसल, हामिद अंसारी ने देश के मुस्लिमों में असुरक्षा और घबराहट के माहौल पर चिंता व्यक्त की थी। उपराष्ट्रपति के तौर पर अपने अंतिम इंटरव्यू के दौरान हामिद अंसारी ने कहा था कि वह देश में बढ़ती असहनशीलता का मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने भी उठा चुके हैं।
इसके अलावा उन्होंने आगे कहा था कि देश के किसी भी नागरिक को अपनी भारतीयता को साबित करना अखरता है। अगर हम भारत में रह रहे हैं तो यही हमारी भारतीयता को साबित करता है। भीड़ के हाथों हत्याएं, अंधविश्वास, घर वापसी और बीफ बैन जैसे मुद्दों से भारतीय मूल्यों में कमी आई है।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'देश के अल्पसंख्यकों में असुरक्षा-घबराहट का माहौल' क्या आप निवर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के इस बयान से सहमत हैं? पोल के जवाब में हमें कुल 20,243 वोट मिले। इनमें 27.26 फीसदी (5518 वोट) पाठकों ने हां में जवाब देते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान 'देश के अल्पसंख्यकों में असुरक्षा-घबराहट का माहौल' से सहमति जताई है। जबकि 71.26 फीसदी (14,444 वोट) पाठकों ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान 'देश के अल्पसंख्यकों में असुरक्षा-घबराहट का माहौल' से असहमति जताई। वहीं, 1.39 फीसदी (281 वोट) पाठकों ने इस मुद्दे पर कोई राय जाहिर करने में असमर्थता जताई।