अग्रणी न्यूज पोर्टल अमर उजाला डॉटकॉम ने देश में कोरोना वायरस की तीसरी लहर को लेकर पोल कराया है। इसमें पाठकों से पूछा गया था कि विभिन्न रिपोर्ट्स को पढ़ने के बाद आपके अनुसार कोरोना की तीसरी लहर कब आने की आशंका है? पोल में शामिल बहुसंख्य लोगों यानी 51.04 फीसदी ने कहा है कि यह अक्तूबर में आ सकती है। पोल में शामिल 17.8 फीसदी लोगों ने आशंका जताई है कि तीसरी लहर जुलाई में आएगी, जबकि 31.07 फीसदी लोगों ने कहा है कि यह अगले साल आएगी।
एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया: यदि कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं किया गया और भीड़-भाड़ नहीं रोकी गई तो अगले छह से आठ सप्ताह में वायरल संक्रमण की अगली लहर देश में दस्तक दे सकती है। जब तक बड़ी संख्या में आबादी का टीकाकरण नहीं हो जाता, तब तक कोविड-उपयुक्त व्यवहार का आक्रामक तरीके से पालन करने की आवश्यकता है। अब तक इस बात का कोई सबूत नहीं है कि संक्रमण की अगली लहर में बच्चे अधिक प्रभावित होंगे।
दिल्ली स्थित गंगाराम अस्पताल के डॉ. (लेफ्टिनेंट जनरल) वेद चतुर्वेदी: वायरस म्यूटेट हो रहा है, इसलिए माना जा रहा है कि तीसरी लहर आ सकती है। इंग्लैंड में अचानक से केस फिर से आने लगे हैं और वहां लॉकडाउन लगा रहे हैं। उसी तरह अगर हमारे यहां शुरुआत हो रही है, तो केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि खुद के व्यवहार में बदलाव लाना होगा। इससे अगर तीसरी लहर आती भी है, तो हम उसे रोक सकते हैं, एक तो अपने व्यवहार से और दूसरा वैक्सीन से।
एम्स दिल्ली के प्रो. नीरज निश्चल: तीसरी लहर मुख्यरूप से दो महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी- पहला वायरस से संबंधित और दूसरा मानव-संबंधी। वायरस में होने वाला म्यूटेशन और उससे जनित जटिलताएं हमारे हाथ में नहीं हैं लेकिन मानव-संबंधी कारकों को हम अपने प्रयासों से दूर कर सकते हैं। तीसरी लहर से बचने के लिए लोगों को कोविड से बचाव के बताए गए नियमों का सख्ती से पालन करते रहना होगा। कसे हुए मास्क पहनना, हाथों की साफ-सफाई रखना और शारीरिक दूरी बनाए रखना हर समय आवश्यक है।