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चिंताजनक: दवा-प्रतिरोधी फंगस कैंडिडा ऑरिस बना दुनिया के लिए खतरा, जानें हर वर्ष कितने लाख लोग आते हैं चपेट में

Wed, 14 Jan 2026 05:34 AM IST
हिमांशु चंदेल अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

 दवा-प्रतिरोधी फंगस कैंडिडा ऑरिस तेजी से वैश्विक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। एंटीफंगल इलाज मौजूद होने के बावजूद इसकी मृत्यु दर बेहद ऊंची है। हर साल लाखों लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं, खासकर अस्पतालों और आईसीयू में भर्ती मरीज। 
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अस्पतालों के लिए गंभीर चुनौती है ये फंगस - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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जापान में पहली पहचान के डेढ़ दशक बाद दवा-प्रतिरोधी फंगस कैंडिडा ऑरिस दुनियाभर के अस्पतालों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। भारतीय वैज्ञानिकों के नेतृत्व में हुए नए अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि यह फंगस न केवल तेजी से फैल रहा है, बल्कि समय के साथ अधिक खतरनाक भी होता जा रहा है।
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जलवायु परिवर्तन, सीमित एंटीफंगल विकल्प और पहचान की कठिनाइयों के बीच यह संक्रमण वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों की तैयारियों की परीक्षा ले रहा है। कैंडिडा ऑरिस एक ऐसा फंगस है जो इन्सानी त्वचा पर आसानी से बस जाता है, और अस्पतालों के वातावरण में लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता रखता है। इसकी सबसे बड़ी चिंता है कि यह कई एंटीफंगल दवाओं को बेअसर कर देता है, जिससे इलाज जटिल और देर से प्रभावी होता है। विश्व स्तर पर आक्रामक फंगल संक्रमण तेजी से बढ़ रहे हैं और हर साल लगभग 65 लाख लोग गंभीर संक्रमण की चपेट में आते हैं।

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क्या कहते हैं शोध के नतीजे?
  • एंटीफंगल इलाज उपलब्ध होने के बावजूद कैंडिडा ऑरिस जैसे फंगल संक्रमणों में मृत्यु दर अक्सर 50 फीसदी से अधिक रहती है।
  • यह अध्ययन वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शस डिजीज और हैकनसैक मेरिडियन सेंटर फॉर डिस्कवरी एंड इनोवेशन के वैज्ञानिकों ने किया है।
  • शोध के नतीजे जर्नल माइक्रोबायोलॉजी एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी रिव्युज में प्रकाशित हुए हैं।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि गर्म और आर्द्र मौसम कैंडिडा ऑरिस जैसे फंगस के उभरने और तेजी से फैलने के लिए अनुकूल होता है।
  • जलवायु परिस्थितियों में बदलाव से भविष्य में ऐसे फंगल संक्रमणों का खतरा और बढ़ सकता है।

इसलिए है खतरनाक
इस फंगस की कोशिका-दीवार की अनोखी संरचना इसे खास बनाती है। शर्करा से भरपूर यह दीवार दवाओं से बचाव करती है और इन्सानी कोशिकाओं से मजबूती से चिपकने में मदद करती है। अध्ययन के अनुसार यह फंगस अपनी बनावट बदल सकता है, खमीर जैसी अवस्था से धागेनुमा रूप में फैल सकता है और अपने जीन की अभिव्यक्ति को पर्यावरण के अनुसार ढाल सकता है। यही लचीलापन इसे प्रतिरक्षा प्रणाली से बच निकलने में सक्षम बनाता है।

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अस्पतालों में टिके रहने की क्षमता
कैंडिडा ऑरिस प्लास्टिक, धातु और अन्य निर्जीव सतहों पर भी लंबे समय तक जीवित रह सकता है। यही कारण है कि यह अस्पतालों और आईसीयू में तेजी से फैलता है। पारंपरिक सफाई उपाय भी कई बार इसे पूरी तरह खत्म नहीं कर पाते, जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है।

सीमित दवाएं और नई उम्मीदें
फंगल संक्रमण के इलाज के लिए वर्तमान में एंटीफंगल दवाओं के चार वर्ग उपलब्ध हैं, जिन्हें बीसवीं सदी के दूसरे हिस्से में विकसित किया गया था। इनका प्रभाव अलग-अलग स्तर का है और कैंडिडा ऑरिस कई मामलों में इनसे भी बच निकलता है। हालांकि राहत की बात यह है कि तीन नई दवाएं परीक्षण के चरण में हैं या हाल ही में मंजूरी पा चुकी हैं, जिनसे भविष्य में इलाज के विकल्प बढ़ने की उम्मीद है।


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