बता दें कि 2019 में पुलवामा हमला होने से पहले भी केंद्र सरकार से हवाई यात्रा सेवा की सुविधा प्रदान करने का आग्रह किया गया था। उस वक्त केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हवाई यात्रा सेवा को मंजूरी नहीं दी थी। नतीजा, जवानों के काफिलों को सड़क मार्ग से आवाजाही करनी पड़ी। 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला हो गया। उस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। उसके बाद तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने जवानों के आने-जाने के लिए उन्हें 'एयर कूरियर सर्विस' की सुविधा प्रदान करने की घोषणा की थी। पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 31 अगस्त के बाद 'दिल्ली-श्रीनगर-दिल्ली' और 'श्रीनगर-जम्मू-श्रीनगर' रूट पर एयर कूरियर सर्विस को आगे बढ़ाने की मंजूरी नहीं दी गई। इसके साथ ही उत्तर पूर्व के रूट पर भी सीएपीएफ जवानों की यह सुविधा बंद हो गई थी।
संबंधित नोडल एजेंसी ने मंत्रालय के अधिकारियों को यह सूचना दे दी थी कि हवाई सेवा की पांच माह की मंजूरी अवधि 'एक अप्रैल 2021 से 31 अगस्त 2021 को खत्म हो रही है। 31 अगस्त के बाद एयर कूरियर सर्विस बंद हो जाएगी। मंत्रालय को इस बाबत दो बार सूचित किया गया। पहली बार तीन अगस्त 2021 को मंजूरी के लिए आवेदन पत्र गृह मंत्रालय के पास भेजा गया था। पहले पत्र का कोई जवाब नहीं मिला। चूंकि मामला केंद्रीय बलों के जवानों की सुरक्षा से जुड़ा था, इसलिए सुरक्षा बल इसे लेकर कोई लापरवाही या ढिलाई नहीं बरतना चाहते थे। 24 अगस्त को दोबारा गृह मंत्रालय को सूचित किया गया कि एयर कूरियर सर्विस को आगे की अवधि के लिए स्वीकृति प्रदान की जाए। इसके बाद 31 अगस्त बीत गया, लेकिन फाइल को मंजूरी नहीं मिल सकी। मजबूरन, सुरक्षा बलों को यह आदेश निकालना पड़ा कि अब 'दिल्ली-श्रीनगर-दिल्ली' और 'श्रीनगर-जम्मू-श्रीनगर' रूट पर एयर कूरियर सर्विस रोक दी गई है। अब 16 सितंबर से पहले की तरह जवान एयर कूरियर सर्विस के जरिए आवागमन शुरू कर सकेंगे।