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International Yoga Day: एम्स के अध्ययन में खुलासा, योग के जरिए कम होने लगा माइग्रेन, नींद की बीमारियां भी हुईं कम

Tue, 21 Jun 2022 05:20 AM IST
Jeet Kumar परीक्षित निर्भय, मैसूर।

सार

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने चिकित्सीय अध्ययन के जरिए खुलासा किया है कि योग चिकित्सा से माइग्रेन के लक्षणों को कम किया जा सकता है। 
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस - फोटो : iStock
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विस्तार
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भारत की प्राचीन पहचान योग को न सिर्फ दुनिया में एक नया मुकाम हासिल हुआ है बल्कि चिकित्सीय जगत भी अब वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर यह स्वीकार कर रहा है कि योग चिकित्सा के जरिये कई गंभीर बीमारियों से लोगों को बचाया जा सकता है। साथ ही जो इन बीमारियों की चपेट में है उन्हें भी एलोपैथी के साथ योग के मिश्रित उपचार से बेहतर जीवन लौटाया जा सकता है।

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सोमवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने चिकित्सीय अध्ययन के जरिए खुलासा किया है कि योग चिकित्सा से माइग्रेन के लक्षणों को कम किया जा सकता है। 

डॉक्टरों ने कहा, एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने सीआईएमआर के साथ मिलकर एक अध्ययन किया है जिसमें पता चला कि योग चिकित्सा के जरिए माइग्रेन पीड़ित रोगियों को काफी लाभ होता है। अध्ययन में शामिल मरीजों को जब योग चिकित्सा देना शुरू किया गया तो कुछ ही समय बाद इनमें सुधार के संकेत देखे जाने लगे जो धीरे धीरे रोगी को काफी बेहतर स्थिति में लेकर आए।
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एम्स की वरिष्ठ डॉ. मंजरी त्रिपाठी ने बताया कि माइग्रेन सबसे आम सिरदर्द है जो लगभग सभी आयु के रोगियों में देखने को मिलता है। इसमें युवाओं की संख्या अधिक है। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में करीब 13 से 14 फीसदी सिरदर्द के मामले माइग्रेन से जुड़े हैं। यह ह्दय रोग, मनोवैज्ञानिक तौर पर कमजोरी और आत्महत्या की प्रवृत्ति के लिए एक जोखिम कारक भी है। 

उन्होंने कहा, जब हमने अध्ययन शुरू किया था उस वक्त चिकित्सीय क्षेत्र में बहुत सीमित तथ्य उपलब्ध थे। इसलिए, योग चिकित्सा और माइग्रेन को लेकर बड़े स्तर पर अध्ययन किया जिसके परिणाम काफी बेहतर हैं।

दूसरे अध्ययन में नींद की बीमारियां हुईं दूर
एम्स ने एक और अध्ययन में पता लगाया है, नींद की बीमारियों और योग चिकित्सा को लेकर उनके यहां साल 2012 से ही अध्ययन चल रहा है जो अब पूरा होने के बाद द नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुआ। इस अध्ययन में 41 मरीजों का चयन किया था जिन्हें नींद से जुड़ी बीमारियां थीं। एलोपैथी उपचार के साथ जब इन्हें योग चिकित्सा दी गई तो चार साल में इन्हें काफी फायदा हुआ। 

इस परीक्षण में वैज्ञानिक रूप से योग निद्रा प्रभावी साबित हुई है। डॉक्टरों के अनुसार भारत में एक बड़ी आबादी क्त्रसेनिक इन्?सोम्निया बीमारी से पीड़ित है। शहरी आबादी में यह ?काफी अधिक है। इन्हीं रोगियों पर योग चिकित्सा को लेकर अध्ययन किया गया था। डॉ. मंजरी ने कहा, योग निद्रा अनिद्रा की बीमारी से जूझ रहे लोगों को काफी हद तक फायदा पहुंचा सकती है।

अब नहीं कम होगी याददास्त, डॉक्टरों को मिला भ्रामरी प्राणायाम
स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), आईआईटी दिल्ली और केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने मिलकर भ्रामरी प्राणायाम को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन जारी किया है। इसके अनुसार लोगों को अब भूलने की परेशानी से मुक्ति मिल सकती है। अगर कोई व्यक्ति रोजाना 40 मिनट तक भ्रामरी प्राणायाम करता है तो उसकी याददास्त बढ़ने लगती है। उसके शरीर में रक्तसंचार बेहतर रूप से प्रवाह होने लगता है। यह जानकारी 60 अलग अलग आयु के लोगों पर अध्ययन करने के बाद सामने आई है। 

एआईआईए की डॉ. मेधा कुलकर्णी ने बताया, आईआईटी दिल्ली ने एक उपकरण खोजा जिसे नाक में लगाकर भ्रामरी किया जा सकता है। इस उपकरण की जांच इत्यादि के बाद एक चिकित्सीय अध्ययन शुरू किया गया। यह अध्ययन अभी पूरा नहीं हुआ है। जल्द ही इसके अंतिम परिणाम प्रका?शन की स्थिति में होंगे। लेकिन, अभी तक यह पता चला है कि भ्रामरी के दौरान निकलने वाली ध्वनि का मस्तिष्क पर काफी गहरा असर पड़ता है। अध्ययन में ईईजी जांच के जरिए इस पर नजर रखी जा रही है।

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