कोरोना वायरस की जांच करता कर्मचारी
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कोविड-19 वायरस जनित संक्रमण और इतनी आसानी से खत्म होने वाला नहीं है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डा. आनंद कृष्णन का कहना है कि किसी भी महामारी के दो-तीन फेज आते हैं। वैसे भी कोविड-19 के आने वाले समय में भी नए-नए स्ट्रेन आते रहेंगे। इसलिए लोगों को चाहिए वह सावधानी बरतें और उपायों को लेकर सतर्क रहें। इसमें कोई भी ढिलाई आगे भी समस्या बनेगी।
कोविड-19 वायरस कहीं नहीं जाने वाला, आगे भी रहेगा
डा. कृष्णन का कहना है कि कोविड-19 का वायरस कहीं नहीं जाने वाला है। वैक्सीन के आने से लोगों को निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए। वैसे भी वैक्सीन कार्यक्रम के पूरा होने में अभी एक-दो साल से अधिक का समय लग सकता है। वायरस का नया नया रूप भी सामने आ सकता है। अभी तो यह भी देखना बाकी है कि वैक्सीन कितनी कारगर हो पाती है। इसलिए यहां वैक्सीन से ज्यादा जरूरी लोगों की सावधानी है। देश के लोगों को समझ लेना चाहिए कि अब उन्हें कोविड वायरस के साथ ही जीना पड़ेगा।
सरकार और लोगों ने बरती ढिलाई
डा. कृष्णन का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण की रफ्तार धीमी होते ही लोगों में काफी लापरवाही देखने में आई। बाजारों, सामाजिक कार्यक्रमों में लोगों की भीड़ देखने को मिली। काम धंधे के कारण लोग घरों से बाहर आए और लापरवाही बरती। मेरी लोगों को सलाह है कि वह इसके लिए भी सरकार के भरोसे रहने के बजाय खुद की सुरक्षा, सावधानी के उपायों पर ध्यान दें।
डा. कृष्णन का कहना है कि कुंभ चल रहा है। इसमें भी सरकार के स्तर से कुछ ढिलाई बरती जा रही है। बिहार में विधानसभा चुनाव हुए। पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, लेकिन इस दौरान कोविड-19 के नियमों का पालन ढंग से नहीं हो पा रहा है। हालांकि डा. कृष्णन का कहना है कि देश में चुनाव कराना एक संवैधानिक प्रक्रिया है। इसे पूरा कराना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ-साथ सावधानी भी जरूरी है।