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ब्रेग्जिट: टेंशन में भारत के जूता निर्यातक, 25 साल पहले डूब गए थे करोड़ों

Sun, 26 Jun 2016 06:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा
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यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के बाहर जाने के फैसले ने दुनिया भर के बाजारों में हलचल मचा दी है। इधर, आगरा के जूता निर्यातक टेंशन में हैं। दरअसल, 25 साल पहले 1991 में यूनियन आफ सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक्स (यूएसएसआर) के टूटने के बाद जूता निर्यातकों ने जो झेला, उसकी दहशत अब तक बरकरार है।
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यूरोपीय यूनियन में ब्रिटेन के बाहर जाने के बाद कई और देशों में भी ऐसी मांग तेज होने पर कारोबारियों के सामने मुश्किलें बढ़ सकती हैं, हालांकि आगरा के जूता निर्यातक इस मुश्किल घड़ी का हल खोजने में जुटे हैं और संकट के बाद और मजबूत होने की उम्मीद बांधे हुए हैं।

डूब गए थे करोड़ों, बंद हुई थीं फैक्ट्रियां
बात, दिसंबर 1991 की है। सोवियत यूनियन के टूटने के बाद आगरा की कई कंपनियों को जोर का झटका लगा। यूरोप से पहले आगरा के जूते की सबसे ज्यादा डिमांड रूस और सोवियत यूनियन के देशों में ही थी। यूनियन के देशों के अलग हो जाने के बाद निर्यातकों का करोड़ों रुपये का माल फंस गया, वहीं डिलीवरी के बाद भी भुगतान नहीं हुआ।
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कई निर्यातकों को 35 से 50 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और वह बर्बादी के कगार पर आ गए। कई फैक्ट्रियां बंद हो गईं और करीब दो लाख कारीगरों को बेरोजगार होना पड़ गया। 25 साल बाद यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के बाहर जाने के फैसले पर आगरा के जूता निर्यातकों में कुछ घबराहट दिखी, लेकिन अब बदले वक्त में वह इससे निपटने की तैयारी में जुट गए हैं। कई निर्यातकों का मानना है कि ब्रेग्जिट की प्रक्रिया लंबी है और इसमें धैर्य रखने की जरूरत है। 

'ब्रेग्जिट की पूरी प्रक्रिया में अभी लंबा वक्त लग सकता है। हम अपनी रणनीति उसी नजरिए से बदल रहे हैं। यूरोप के आफिस और माल की डिलीवरी को लेकर समीक्षा कर रहे हैं। इस मुश्किल वक्त का भारतीय निर्यातक हल निकाल रहे हैं। हम और मजबूत होकर निकलेंगे।'
गोपाल गुप्ता, जूता निर्यातक
 
'यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के बाहर निकलने से बाजार में अनिश्चिता का माहौल है। ब्रिटेन के तरह अन्य देशों में भी ऐसा हुआ तो पाउंड और यूरो की कीमतों में गिरावट होनी तय है। इससे आगरा के भी निर्यातकों को नुकसान भुगतना पड़ेगा।'
प्रदीप वासन, जूता निर्यातक


'ब्रेग्जिट का असर जूता निर्यात पर पड़ेगा, लेकिन सोवियत यूनियन के बिखराव के बाद दुनिया का कारोबार बदला है। अब जमाना फ्री ट्रेड का है। आशंका ये है कि कहीं ब्रिटेन की तरह अन्य देश भी अलग होने की शुरुआत न कर दें। तब चिंता करनी होगी।'
कैप्टन एएस राणा, पूर्व अध्यक्ष, एफमेक


'ये अस्थाई झटका है, जिससे हम उबर जाएंगे। ब्रेग्जिट के बाद ब्रिटेन भारत के और करीब आ सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच न केवल कारोबार बढ़ेगा, बल्कि सांस्कृतिक रिश्ते भी और मजबूत होंगे। ब्रेग्जिट का तात्कालिक नुकसान भले हो, लंबी अवधि में फायदा भी हो सकता है।'
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राजेश सहगल, जूता निर्यातक
 
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