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अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद कश्मीर में हालात बिगाड़ने के लिए पाकिस्तान ने चली हर संभव चाल

Wed, 20 Nov 2019 06:34 PM IST
आसिम खान डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला 
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जम्मू-कश्मीर - फोटो : PTI
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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान ने घाटी का माहौल खराब करने के लिए हर संभव चाल चली। पत्थरबाजों को जम्मू कश्मीर प्रशासन के खिलाफ उकसाया। घाटी में मौजूद अपने स्लीपर सैल के जरिए आतंकवादियों को सभी तरह की मदद पहुंचाने की कोशिश की। इन सबके जरिए जब पाकिस्तान अपने नापाक मंसूबों में कामयाब नहीं हुआ तो उसने राजनीतिक और अलगाववादियों पर दबाव बनाया। केंद्र सरकार के सूत्र बताते हैं कि कश्मीर में सुरक्षा बलों का घेरा इतना मजबूत था कि चाह कर भी पड़ोसी राष्ट्र उसे नहीं तोड़ सका। 

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चार अगस्त के बाद सुरक्षा बलों ने कश्मीर घाटी में जो सख्ती दिखाई, उससे पत्थरबाजों, आतंकवादियों, अलगाववादियों और कथित राजनीतिक नेताओं का हौसला जवाब दे गया। अनुच्छेद 370 हटाने की घोषणा होने के बाद से लेकर एक नवंबर तक घाटी में 5161 उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया। इनकी गहन जांच पड़ताल की गई। जैसे-जैसे स्थिति सामान्य होती गई, कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर इन्हें रिहा कर दिया गया। फिलहाल 609 उपद्रवी हिरासत में हैं। इनमें से भी 218 पत्थरबाज हैं। 

बुधवार को राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए गृह राज्यमंत्री जी कृष्ण रेड्डी ने बताया, अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू कश्मीर में कानून व्यवस्था खराब करने का हर संभव प्रयास किया गया। चार अगस्त से लेकर अभी तक कश्मीर में शांति भंग करने वाले, देश की सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों को रोकने एवं कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए 5161 निवारक गिरफ्तारियां की गईं। 
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इनमें पत्थरबाजों और आतंकवादियों को अप्रत्यक्ष रूप से मदद पहुंचाने वाले, अलगाववादी, शरारती तत्व और राजनीतिक व्यक्ति भी शामिल थे। वर्तमान में केवल 609 व्यक्ति निवारक हिरासत में हैं, इनमें से 218 पत्थरबाज हैं। इसके अलावा पांच अगस्त से लेकर 15 नवंबर तक 765 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इनके खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस के अलावा एनआईए भी कई मामलों की जांच कर रही है। इस अवधि में पत्थराव करने और कानून व्यवस्था तोड़ने के आरोप में 190 केस दर्ज किए जा चुके हैं। 

खास बात है कि अनुच्छेद 370 हटाने से पहले यानी एक जनवरी से लेकर चार अगस्त तक पथराव करने और कानून व्यवस्था भंग करने के चलते 361 केस दर्ज किए गए थे। पिछले तीन माह के दौरान जिन उपद्रवियों को रिहा किया गया है, उनकी काउन्सलिंग की गई है। इलाके के सरपंच या पार्षद की गवाही पर उन्हें छोड़ा गया है। अभी तक रिहा हुए सभी लोगों पर नजर रखी जा रही है। 

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