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‘स्वच्छता मिशन’ के बाद अब प्लास्टिक कचरे से मुक्ति के लिए चलेगा अभियान

Fri, 01 Mar 2019 01:54 AM IST
Avdhesh Kumar डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डॉ. हर्षवर्धन - फोटो : PTI
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प्लास्टिक कचरा प्रदूषण के सबसे बड़े कारणों में से एक है, लेकिन इससे छुटकारा पाने के लिए अभी भी गंभीर प्रयास नहीं हो रहे हैं। इसका नतीजा यह हो रहा है दिल्ली जैसे बड़े शहर प्लास्टिक के कचरे के ढेर बनते जा रहे हैं। लेकिन अब प्लास्टिक कचरे को खत्म करने के लिए गंभीर कदम उठाये जाने की उम्मीद बढ़ी है। 
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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने उम्मीद जाहिर की है कि देश को 2022 तक प्लास्टिक कचरे से मुक्त करा लिया जाएगा। इसके लिए कुछ गैर सरकारी संस्थाओं की मदद से मुहिम चलाई जाएगी। यह लक्ष्य लोगों को प्लास्टिक की वस्तुओं के उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देकर जनजागृति पैदा करके और खराब हुए प्लास्टिक की री साइक्लिंग के जरिये हासिल की जाएगी। वे पंडित दीन दयाल उपाध्याय स्मृति मंच के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने देश को कचरे से मुक्त बनाने के लिए हिंदी सहित छ: भाषाओँ में नारे की लांचिंग भी की।

गुरुवार को पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में देश में स्वच्छता को एक मुहिम बनाया गया। इसमें हमें काफी सफलता मिली है। लेकिन अगर किसी भी क्षेत्र को कचरे से मुक्ति दिलानी है तो उसके लिए प्लास्टिक कचरे को खत्म करने का उपाय सोचना पड़ेगा। मंत्री ने कहा कि प्लास्टिक पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता हमारे लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। इसलिए अब बहुत आवश्यक चीजों की पैकेजिंग में ही प्लास्टिक के उपयोग को अनुमति दी जानी चाहिए। प्लास्टिक का सबसे गैर जरूरी उपयोग खाने-पीने की चीजों की पैकेजिंग में हो रही है जो प्रदूषण का बड़ा कारण है। इससे बचने की जरुरत है। 
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पंडित दीन दयाल उपाध्याय स्मृति मंच के अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने बताया कि पूरी दुनिया में प्रतिवर्ष 4.47 करोड़ टन ई कचरा उत्पन्न होता है। इसके आगे चलकर 2021 में 5.52 करोड़ टन तक हो जाने की उम्मीद है। हमारे लिए दुर्भाग्य की बात है कि ज्यादा आबादी के कारण हम दुनिया के पांच सबसे ज्यादा ई कचरा उत्पादक देशों में आते हैं। चीन, अमेरिका, जापान और जर्मनी के बाद भारत का स्थान आता है।

भारत की स्थिति दयनीय

एक रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में प्रति वर्ष 20 लाख टन से अधिक ई कचरा पैदा होता है। ई कचरे में सबसे ज्यादा हिस्सा कम्प्यूटर का होता है जो ई कचरे का लगभग 70 फीसदी है। यहां यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह ई कचरा काफी हद तक री साइकिल किया जा सकता है। इसलिए यह प्रदूषण की दृष्टि से कम हानिकारक है। प्लास्टिक, जो कि री साईकिल नहीं किया जाता, या नहीं किया जा सकता, वह प्रदूषण के मामले में चिंता का सबसे बड़ा कारण है।

विनोद शुक्ला ने बताया कि भारत में भारत के कुल ई कचरे का अभी बहुत कम निस्तारण होता है। लक्ष्य रखा गया है कि 2023 तक 70 फीसदी ई कचरे का निस्तारण कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि इसी तरह प्लास्टिक के उपयोग को कम करके, और इसकी री साइक्लिंग को बढ़ावा देकर प्लास्टिक कचरे से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है।  
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