जानकारी के मुताबिक तहरीक-ए-तालिबान और आईएस खोरासन के कमांडरों की आपस में हुई बातचीत के दौरान तय हुआ है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बॉर्डर एरिया फेडरली एडमिनिस्टर्ड ट्राइबल एरियाज (एफएटीए) में अपनी गतिविधियों को केंद्रित करके आगे की रणनीति बनाएंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन दोनों आतंकवादी संगठनों के साथ-साथ पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर ए इस्लाम के कमांडर भी इसमें शामिल होंगे। दरअसल आईएस खोरासन और पाकिस्तान के तहरीक-ए-तालिबान समेत लश्कर-ए-इस्लाम और अन्य कई पाकिस्तानी आतंकी संगठन इस बात को लेकर के विरोध कर रहे हैं कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान की शह पर सत्ता नहीं चलनी चाहिए। जबकि हकीकत यही है कि अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार को पाकिस्तान की सरकार का पूरा संरक्षण मिला हुआ है।
चीन में उईगर मुसलमानों के साथ हुए अत्याचार को लेकर भी अफगानिस्तान में आईएस खोरासन समेत कई आतंकवादी संगठन अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार के विरोध में आतंकी वारदात को अंजाम देने की तैयारियां करने लगे हैं। दरअसल अफगानिस्तान में उईगर मुसलमानों की आबादी तो बहुत ज्यादा नहीं है, इसलिए उन्हें अल्पसंख्यकों का दर्जा मिला हुआ है। उधर मुसलमानों का एक बड़ा संगठन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कई प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के साथ मिलकर अपनी आवाज बुलंद करता रहता है। सूत्रों के मुताबिक बीते कुछ समय में चीन ने उईगर मुसलमानों के साथ न सिर्फ बर्बरता की है बल्कि अमानवीय हरकतों के साथ उन को मौत के घाट उतारा है। इसके प्रतिशोध में अफगानिस्तान में आतंकी संगठन तालिबानी सरकार के विरोध में खड़े हो गए हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता और विदेश मामलों के जानकार प्रोफ़ेसर एसएन शुक्ला कहते हैं कि पाकिस्तान की तरह चीन भी अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार को न सिर्फ सपोर्ट कर रहा है बल्कि उसे आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है। ऐसे में चीन में हुए उईगर मुसलमानों के ऊपर अत्याचार का विरोध अफगानिस्तान में होना लाजिमी भी है। क्योंकि चीन पहले से अफगानिस्तान को इस बात के लिए दबाव में लेता रहा है कि अफगानिस्तान में मौजूद उईगर मुसलमानों को बहुत ज्यादा छूट ना दी जाए। यही वजह है कि अफगानिस्तान में तमाम कारणों की वजह से पाकिस्तान के विरोध में झंडा बुलंद करने वाले पाकिस्तान में प्रतिबंधित कई आतंकी संगठन अफगानिस्तान कि तालिबानी सरकार के विरोध में खड़े हैं।