दरअसल पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कबीलाई इलाकों में अल-कायदा के कैंप लगातार ओसामा बिन लादेन और उसके बाद अल जवाहिरी के देखरेख में चलते रहे। 9/11 के बाद जब अफगानिस्तान में अमेरिकी फौज पहुंची तो अल-कायदा संगठन के चल रहे कैंप में घुसपैठ कर उन्हें नेस्तनाबूद करने की कोशिश की। लेकिन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के इलाकों में अल-कायदा के चलने वाले कैंप अंडर ग्राउंड हो गए। खुफिया सूत्रों के मुताबिक अलकायदा ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के तमाम छोटे-छोटे आतंकवादी संगठनों के साथ मिलकर अपने प्रशिक्षण कैंप जारी रखे। अब जब अफगानिस्तान में अलकायदा के सरपरस्तों की सत्ता वापस आ गई है तो स्लीपर सेल की तरह दूसरे आतंकी संगठनों में काम करने वाले अलकायदा और आईएस के आतंकी भी बाहर निकलने लगे हैं। इसमें तालिबान ने अलकायदा और आईएस के आतंकियों को रिहा करके आग में घी डालने जैसा काम भी कर दिया ।
उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान ने सोमवार को जिस अंदाज में अमेरिका को एयरपोर्ट खाली करने की चेतावनी दी है वह इस बात की तस्दीक करता है कि उसके पास सिर्फ अफगानिस्तान की जमीन पर लड़ने के लिए ही आतंकवादी नहीं है बल्कि उसका नेटवर्क आईएस और अलकायदा के साथ पूरी दुनिया में फैला हुआ है। सिर्फ अफगानिस्तान के दक्षिणी इलाकों के कबीलाई क्षेत्रों में कि अल-कायदा के तकरीबन चार सौ से ज्यादा आतंकवादी और कमांडर अभी भी अलकायदा के बैनर के नीचे प्रशिक्षण लेते हैं। शनिवार को अलकायदा के जेलों से रिहा किए गए कमांडरों ने अपने कई कैंप के सरगनाओं से बात भी। विदेशी मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरीके से तालिबान दुनिया के खूंखार आतंकवादी संगठनों के कमांडरों को जेल से रिहा कर रहा है वह आने वाले वक्त मैं खतरे की बड़ी घंटी की तरह है।