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Aditya-L1: आदित्य एल1 बनेगा भारत की नजर, खतरों से बचाएगा, जानिए सातों उपकरणों के नाम और उनके काम

Sun, 03 Sep 2023 06:55 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आदित्य एल1 उपग्रहों और भविष्य में मानव मिशन के समय अंतरिक्ष यात्रियों को विकिरण के खतरों से बचाएगा। जानिए इनके बारे में...
 
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isro aditya l1 mission - फोटो : Isro
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विस्तार
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भारत का आदित्य एल1 मिशन सूर्य के कोरोना के भीतरी हिस्से की पड़ताल करेगा, यहां छिपे रहस्य खोजेगा। भारतीय ताराभौतिकी संस्थान की निदेशक अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम ने बताया कि इस प्रकार का अध्ययन पहली बार होने जा रहा है। सुब्रमण्यम के अनुसार मिशन में शामिल विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) के जरिये भारत को सूर्य पर हर समय नजर रखने में कोई भी बाधा नहीं आएगी, यहां तक कि सूर्य ग्रहण के दौरान भी। यह पहला मिशन है जो सूर्य के कोरोना के अंदरूनी हिस्से को करीब से देखेगा। भारत का आदित्य एल1 मिशन सूर्य को ऑप्टिकल, परा-बैंगनी और एक्स-रे इन तीनों माध्यमों से निगरानी में रखेगा।

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इन सबके अलावा आदित्य एल1 उपग्रहों और भविष्य में मानव मिशन के समय अंतरिक्ष यात्रियों को विकिरण के खतरों से बचाएगा। जानिए इनके बारे में...

उपकरण: विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी)
निर्माता: भारतीय ताराभौतिकी संस्थान, बंगलूरू

काम: सूर्य के कोरोना का अध्ययन, तापमान, वेग, घनत्व को समझना। इससे हो रहे उत्सर्जन व बदलावों का अध्ययन। वीईएलसी हमें सूर्य के बारे में कई नई जानकारियां दे सकता है।



उपकरण: सोलर अल्ट्रा-वॉयलेट इमेजिंग टेलिस्कोप (सूट)
निर्माता: खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी अंतर-विश्वविद्यालय केंद्र, पुणे

काम: सूर्य के फोटोस्फीयर और क्रोमोस्फीयर की पराबैंगनी तस्वीरें लेना। यह तस्वीरें सूर्य के क्रोमोस्फीयर व कोरोना के गर्म होने के अध्ययन व इनके बारे में नई जानकारियां पाने में मदद करेंगी।
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उपकरण: सोलर लो-एनर्जी एक्स रे स्पेक्ट्रोमीटर
निर्माता: यूआर राव सैटेलाइट सेंटर, बंगलूरू

काम: सूर्य एक्स-रे का अध्ययन। उत्सर्जन की नई जानकारियां व पृथ्वी पर इनका बुरा असर जान पाएंगे।

उपकरण: हाई-एनर्जी एल1 ऑर्बिटिंग एक्स रे स्पेक्ट्रोमीटर
निर्माता: यूआर राव सैटेलाइट सेंटर, बंगलूरू

काम: एल1ओएस भी सूर्य से आने वाली एक्सरे का अध्ययन करेगा, लेकिन उच्च ऊर्जा वाली। इनसे पृथ्वी पर जीवन पर हो रहे असर समझने में मदद मिलेगी।

उपकरण: सोलर विंड पार्टिकल एक्सपेरिमेंट (एसपेक्स)
निर्माता: भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद

काम : एल1 बिंदु के आसपास सौर पवन व सूर्य से निकले कणों का अध्ययन, इनकी उत्पत्ति, संरचना व फैलाव को जानना। इनका पृथ्वी के कृत्रिम उपग्रहों पर दुष्प्रभाव हो सकता है।

उपकरण: प्लाज्मा एनालाइजर पैकेज फॉर आदित्य (पापा)
निर्माता: अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम

काम: आयनीकृत प्लाज्मा की भौतिकी समझना। सूर्य से प्लाज्मा वितरण जानने में मदद करेगा। पृथ्वी की ओर आ रहे सौर तूफान को पहले से भांपेगा।

उपकरण: मैग्नेटोमीटर
निर्माता: इलेक्ट्रो ऑप्टिक्स सिस्टम्स प्रयोगशाला, बंगलूरू

काम: एल1 के आसपास अंतर-ग्रहीय चुंबकीय क्षेत्र मापना। सूर्य के फैलाव व प्रभाव के गति विज्ञान का अध्ययन भी होगा।

चार उपकरण सूर्य के उजाले पर शोध करेंगे
इस मिशन में भेजे गए सात उपकरणों में से चार केवल सूर्य के उजाले पर केंद्रित शोध व अध्ययन करेंगे। वहीं 3 उपकरण एल1 बिंदु पर रहते हुए प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र के विभिन्न मानकों पर डाटा जुटाएंगे।

खगोलीय घटनाओं को समझाएगा, जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में भी मिलेगी मदद
इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी माधवन नायर ने बताया कि आदित्य एल1 वैज्ञानिकों को खगोलीय घटनाओं को समझने में मदद करेगा। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में भी काम आएगा। नायर ने कहा, इसका डाटा कई तरह से उपयोगी होगा।

कम ईंधन का मिशन
लग्रांजियन बिंदु 1 पर यान को स्थापित किया जा रहा है, इस क्षेत्र में पृथ्वी और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण एकदूसरे को निरस्त कर देते हैं। इस तरह यहां कम से कम ईंधन में मिशन पूरा होगा। आदित्य एल1 करीब चार महीने में यहां पहुंचेगा। सात उपकरण भारत को सूर्य पर हर समय नजर रखने में मदद करेंगे।

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