केंद्र सरकार ने अंग्रेजी के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) आयोजित करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष याचिका का समर्थन किया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने क्षेत्रीय भाषाओं में क्लैट कराने पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की है। इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का भी उल्लेख किया गया है, जो कहती है कि कानून की शिक्षा प्रदान करने वाले राज्य संस्थानों को भविष्य के वकीलों और न्यायाधीशों के लिए अंग्रेजी और उस राज्य की भाषा में द्विभाषी शिक्षा प्रदान करने पर विचार करना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव नरूला की खंडपीठ को शुक्रवार को सरकार के रुख से अवगत कराया गया, जब उसने सुधांशु पाठक नामक एक छात्र की जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने सरकार से मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले को आगे विचार के लिए 15 सितंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।
क्लैट कई भाषाओं में कराना संभव नहीं: एनएलयू
कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (एनएलयू) ने दायर हलफनामे में कहा कि क्लैट 2024 (3 दिसंबर, 2023 को निर्धारित) को कई भाषाओं में आयोजित करना संभव नहीं है, क्योंकि इसमें वास्तविक और प्रक्रियात्मक कठिनाइयां हैं। कंसोर्टियम ने कहा कि विशेषज्ञों की टिप्पणियों और गहन परामर्श के बाद क्लैट के भविष्य के संस्करणों को संचालित करने के लिए एक उचित नीतिगत निर्णय लिया जाएगा।