जहां एक तरफ दुनिया के कई देशों में डेल्टा का नया वैरिएंट पैर पसार रहा है, वहीं टीकाकरण के मामले में भारत ने 100 करोड़ का एतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। हालांकि अब भी लोग वैक्सीनेशन को लेकर सुस्त रवैया अपनाते हुए नजर आ रहे हैं। कोविड की दूसरी लहर के काबू में आने के बाद लोग वैक्सीन की दूसरी डोज लेने में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय का भी मानना है कि पहला टीका लगवा चुके लोगों को दूसरी खुराक लगवाने के लिए तैयार करना अगली बड़ी चुनौती होगी।
हाल ही में कोरोना की दूसरी खुराक को लेकर बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) के 'सेंटर फॉर कस्टमर इनसाइट' (सीसीआई) ने 3500 लोगों से बातचीत की। ये सभी लोग कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक ले चुके हैं। इसमें 35 फीसदी लोग ऐसे भी हैं, जो दूसरी डोज लेने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे लोगों का मानना है कि कोविड महामारी से बचाव के लिए एक खुराक ही पर्याप्त है।
सर्वे के अनुसार, दूसरी खुराक लगाने के मामले में 15 सितंबर तक महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे राज्य आगे रहे हैं। मई माह में महाराष्ट्र में दोनों खुराक लगा चुके लोगों की संख्या चार फीसदी थी जो सितंबर में बढ़कर 14 फीसदी तक हो गई है। वहीं आंध्र प्रदेश का प्रदर्शन पांच प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 19 प्रतिशत हो गया। जबकि गुजरात में ये छह प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कोविड की दूसरी लहर अब लगभग नियंत्रण में आ गई है, इसलिए लोग दूसरी खुराक को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं। लोगों के मन में एक कारण यह भी आ रहा है कि एक खुराक से ही शरीर में प्रतिरोधी क्षमता पैदा हो रही है, जो काफी है। शहरी क्षेत्रों में टीके लगवाने में दिचलस्पी रखने वाले लोगों की संख्या मार्च से ही कम होनी शुरू हो गई थी। बड़े शहरों में पहली खुराक लगाने वाले में रुचि रखने वाले लोगों की संख्या 48 फीसदी थी जो सितंबर में कम होकर 34 फीसदी रह गई है। जबकि टीका लेने से इनकार करने वालों की संख्या जस की तस बनी हुई हैं। मार्च में ऐसे लोगों की संख्या सात प्रतिशत थी जो सितंबर में छह प्रतिशत है। जबकि दूसरी खुराक के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले शहरी क्षेत्रों में अधिक उत्साह देखा जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के भी वरिष्ठ अफसरों का मानना है कि कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगवा चुके लोगों को दूसरी खुराक लगवाने के लिए तैयार करना अगली बड़ी चुनौती होगी। तीसरी लहर की आंशका के बीच पहली खुराक ले चुके लोगों को दूसरी खुराक लगाना बेहद जरूरी है। इस संदर्भ में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ऐसे राज्यों को पत्र लिख चुका है जो दूसरी खुराक लगाने में सुस्त गति से आगे बढ़ रहे हैं।