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केरल: यौन शोषण के दोषी डॉक्टर को सात साल की कैद, नाबालिग को फोन पर दिखाता था अश्लील वीडियो; ऐसे हुआ खुलासा

Thu, 27 Apr 2023 09:39 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

6 दिसंबर 2015 से 21 फरवरी 2017 की अवधि के दौरान बच्चे का यौन शोषण किया गया था, जब उसे परामर्श के लिए मनोवैज्ञानिक के पास लाया गया था। घटना के बाद नाबालिग की मानसिक स्थिति और गंभीर हो गई थी।
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जेल (डेमो) - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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केरल की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गुरुवार को गुरुवार को एक क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट को सात साल की सजा सुनाई है। उसे एक तेरह वर्षीय लड़के का यौन शोषण करने का दोषी ठहराया गया। न्यायाधीश आज सुदर्शन ने दोषी डॉक्टर के गिरीष पर डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। 

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जुर्माना न भरा तो चार साल की अतिरिक्त सजा
पब्लिक प्रोसिक्यूटर आरएस विजय मोहन ने संवाददाताओं को बताया, अगर जुर्माने का भुगतान नहीं किया जाता है तो दोषी को चार साल की अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी। डॉक्टर को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत उन अपराधों के लिए सात साल की सजा सुनाई गई है, जिनमें एक बच्चे पर यौन हमला, एक नाबालिग पर बार-बार यौन हमला और एक बच्चे का यौन उत्पीड़न शामिल है। 
 

कोर्ट ने एक साल पहले भी सुनाई थी सजा
आरएस विजय मोहन ने बताया, अदालत ने उसे मानसिक रोगी के यौन उत्पीड़न के अपराध में पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है। उन्होंने बताया कि अदालत ने बुधवार को डॉक्टर को 2015-17 की अवधि के दौरान अपने घर के पास एक प्राइवेट क्लिनिक में नाबालिग लड़के का यौन शोषण करने का दोषी पाया है। इसी अदालत ने एक साल पहले इसी तरह के एक मामले में आरोपी को छह साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने उसे जमानत दे दी थी। 
 

क्या था पूरा मामला
6 दिसंबर 2015 से 21 फरवरी 2017 की अवधि के दौरान बच्चे का यौन शोषण किया गया था, जब उसे परामर्श के लिए मनोवैज्ञानिक के पास लाया गया था। घटना के बाद नाबालिग की मानसिक स्थिति और गंभीर हो गई। तब आरोपी ने मामले को अन्य डॉक्टरों के पास भेज दिया और नाबालिग को घटना का खुलासा न करने की धमकी दी।
 
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ऐसे हुआ घटना का खुलासा
इससे बच्चा डर गया और उसने बात का खुलासा नहीं किया। परिवार ने तब कई अन्य मनोवैज्ञानिकों से परामर्श किया। 2019 में बच्चे को यहां मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में भर्ती कराया गया था और जब डॉक्टरों ने केस हिस्ट्री पता की, तो नाबालिग ने उन्हें घटना के बारे में बताया। यह भी आरोप लगाया गया था कि आरोपी फोन पर बच्चे को अश्लील वीडियो दिखाता था।
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