अध्ययन में प्रतिभागियों के जीवन के नौ पहलुओं पर भी गौर किया गया, उदाहरण के लिए दिनचर्या, भूख, सोने का समय, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और उनमें मौजूद ऊर्जा। जीओक्यूआईआई के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल गोंदल ने कहा, 'हमारा अध्ययन इस बात की ओर संकेत करता है कि कोरोना वायरस का प्रसार और उसकी वजह से लागू लॉकडाउन से देश में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से सामना करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है।'
उन्होंने कहा, 'बढ़ती अनिश्चितता उच्च तनाव सूचकांक का आधार है जिसे संतुलित भोजन, दिनचर्या में बदलाव, उचित नींद लेकर नियंत्रित किया जा सकता है।' अध्ययन के मुताबिक जिन लोगों ने अवसादग्रस्त होने की शिकायत की उन्होंने बताया कि उन्हें काम करने में रुचि नहीं होती। वे नाउम्मीद हो चुके हैं और बेतरतीब नींद के शिकार हैं, उन्हें थकान महसूस हो रही है। अध्ययन में सलाह दी गई है कि रोजाना एक बार व्यायाम करने से मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में मदद मिलती है।
अध्ययन के मुताबिक, '59 फीसदी भारतीयों ने कहा कि इन दिनों उन्हें काम करने में बहुत कम आनंद आता है। इनमें से 38 फीसदी लोगों में यह भावना कुछ दिनों तक रही जबकि नौ फीसदी ने कहा कि वे आधे से अधिक दिनों तक इस भावना से ग्रस्त रहे। वहीं करीब 12 फीसदी ने कहा कि हर रोज उन्हें ऐसा महसूस होता है।' अध्ययन में शामिल 57 फीसदी प्रतिभागियों ने शिकायत की कि गत सप्ताह से कुछ दिन से वे थका हुआ या ऊर्जा विहीन महसूस कर रहे हैं।