देशभर में कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग के बीच तीसरे चरण का वैक्सीनेशन अभियान एक मई से शुरू हो रहा है, जिसमें 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोग टीका लगवा सकेंगे। केंद्र सरकार का कहना है कि वह 18 से 45 साल के आयु वर्ग के लोगों के लिए टीकों की आपूर्ति नहीं करेगी। ऐसे में लोगों को वैक्सीन खुद खरीदनी पड़ेगी या फिर राज्य सरकारों को टीकों की खरीद करनी होगी। हालांकि, कुछ राज्यों ने ऐलान किया है कि वह अपने लोगों को मुफ्त वैक्सीन की सुविधा देंगे। ऐसे में इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (इंड-रा) ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी कि कोविड-19 के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों के वैक्सीनेशन पर कितना खर्च आएगा।
राज्य पर सामूहिक रूप से 46,323 करोड़ का आएगा खर्च
इंडिया रेटिंग्स के मुताबिक, 133.26 करोड़ की कुल आबादी में से जो अब टीकाकरण के लिए पात्र जनसंख्या होगी उसकी संख्या 84.19 करोड़ है। गणना के बाद इंड-रा ने कहा, ‘इस काम पर 67 हजार 193 करोड़ रुपये की लागत आ सकती है, जो जीडीपी का 0.36 प्रतिशत बैठता है। इसमें से केंद्र सरकार 20 हजार 870 करोड़ रुपये और सभी राज्य सरकारों पर सामूहिक रूप से 46 हजार 323 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।'
तय है वैक्सीन की कीमत
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने राज्य सरकारों और प्राइवेट अस्पतालों के लिए वैक्सीन की कीमत तय कर दी है। सीरम ने कहा है कि वह प्राइवेट अस्पतालों को जहां 600 रुपए में कोविशील्ड वैक्सीन की एक डोज देगी, वहीं राज्य सरकारों को 400 रुपए में वैक्सीन की एक डोज देगी। इसका मतलब है कि राज्य सरकार को एक आदमी को वैक्सीन देने में 800 रुपए का खर्च पड़ेगा।
सरकार ने कोरोना वायरस टीके के मूल्य निर्धारण, खरीद, पात्रता और प्रशासन को लचीला बनाया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों को निर्माताओं से सीधे अतिरिक्त कोरोना के टीके लेने की अनुमति दी गई है। बताते चलें कि निशुल्क टीकाकरण का ऐलान करने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, बिहार, केरल का नाम शामिल है।