सांसदों ने कहा- बच्ची को घर भेजने का समय आ गया
इन सांसदों ने अपने पत्र में कहा, "हम आपके देश की किसी भी एजेंसी पर आक्षेप नहीं लगाते हैं और यह मानते हैं कि जो कुछ भी किया गया वह बच्चे के सर्वोत्तम हित में सोचा गया था। हम आपके देश में कानूनी प्रक्रियाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन यह देखते हुए कि उक्त परिवार के किसी भी सदस्य के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है, बच्ची को घर वापस भेजने का समय आ गया है।"
इन सांसदों ने किया पत्र का समर्थन
सांसदों ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर पत्र का समर्थन किया है। इनमें इनमें हेमा मालिनी (भाजपा), अधीर रंजन चौधरी (कांग्रेस), सुप्रिया सुले (राकांपा), कनिमोझी करुणानिधि (द्रमुक), महुआ मोइत्रा (तृणमूल कांग्रेस), अगाथा संगमा (एनपीपी), हरसिमरत कौर बादल (शिअद), मेनका गांधी (भाजपा), प्रणीत कौर (कांग्रेस), शशि थरूर (कांग्रेस) और फारूक अब्दुल्ला (नेकां) शामिल हैं।
2022 में पुलिस ने बंद कर दिया था केस
उन्होंने कहा कि अरिहा के माता-पिता धरा और भावेश शाह इसलिए बर्लिन में थे, क्योंकि बच्ची के पिता वहां एक कंपनी में कार्यरत थे। परिवार को अब तक भारत वापस आ जाना चाहिए था, लेकिन कुछ दुखद घटनाएं हुई। अरिहा को उसके माता पिता से इसलिए दूर ले जाया गया था, क्योंकि बच्चे को पेरिनियम (गुदा और अंडकोष या योनिमुख के बीच का भाग) में चोट लगी थी, जिसके लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाल यौन शोषण के लिए उसके माता-पिता के खिलाफ एक जांच शुरू की गई थी। फरवरी 2022 में माता-पिता के खिलाफ किसी भी आरोप के बिना पुलिस केस को बंद कर दिया गया था।
अस्पताल ने यौन शोषण की संभावना से किया इनकार
पत्र में कहा गया है कि अस्पताल ने भी एक रिपोर्ट जारी कर यौन शोषण की संभावना से इनकार किया है। इसके बावजूद बच्ची को उसके माता-पिता को नहीं लौटाया गया और बाल कल्याण एजेंसी जुगेंडम ने जर्मनी की अदालतों में बच्चे की स्थायी हिरासत के लिए दबाव डाला। जुगेंडम का कहना है कि भारतीय माता-पिता अपने बच्चे की देखभाल करने में असमर्थ हैं जो जर्मन फॉस्टर केयर में बेहतर होगी।
बच्ची के अपने माता-पिता के साथ गहरे संबंध
उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा नियुक्त मनोवैज्ञानिक द्वारा माता-पिता के मूल्यांकन के मामले में डेढ़ साल से अधिक का समय लगा है। उसे (बच्ची को) एक देखभालकर्ता से दूसरे में स्थानांतरित करने से बच्चे को गहरा और हानिकारक आघात होगा। माता-पिता को केवल पाक्षिक यात्राओं की अनुमति है। इन मुलाकातों के वीडियो दिल दहला देने वाले होते हैं और इनसे पता चलता है कि बच्ची के अपने माता-पिता के साथ गहरे संबंध हैं और जुदाई का दर्द क्या है।
बच्ची को खिलाया जा रहा मांसाहारी भोजन
पत्र में उन्होंने कहा, "एक और पहलू है। हमारे अपने सांस्कृतिक मानदंड हैं। बच्ची एक जैन परिवार से संबंधित है जो सख्त शाकाहारी हैं। बच्चे को एक विदेशी संस्कृति में ढाला जा है, उसे मांसाहारी भोजन खिलाया जा रहा है। यहां भारत में होने के नाते, आप बेहतर ढंग से समझ सकते हैं कि यह हमारे लिए कितना अस्वीकार्य है।"
सरकार के सूत्रों ने शनिवार को कहा कि 2021 में एक भारतीय बच्ची को उसके माता-पिता से छीनने वाली जर्मन एजेंसी की कार्रवाई का बचाव करने वाली खबरें गलत हैं और इस मुद्दे को भटकाने का प्रयास प्रतीत होती हैं। सूत्रों ने यह भी कहा कि जर्मन एजेंसी ने किसी भी समय बच्चे की देखभाल करने के इच्छुक किसी भी भारतीय पालक परिवार के बारे में जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्दा यह है कि एक भारतीय बच्चे को भारत लौटने की अनुमति नहीं दी जा रही है।