केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भले ही एक पुस्तिका जारी करके सितंबर में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ में 45 फीसदी की कमी बताई हो, लेकिन साऊथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के आंकड़े कुछ और ही चुगली कर रहे हैं। हालत यह है कि सुरक्षा बलों की राज्य में और नियंत्रण रेखा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शहादत बढ़ रही है। केन्द्रीय गृहमंत्रालय द्वारा जारी इस रिपोर्ट में 2011-13 के दौरान 239 आतंकियों को मार गिराने का दावा किया है। मंत्रालय की इस रिपोर्ट के अनुसार 2014-2017 के दौरान 368 आतंकी मारे गए। जबकि गृहमंत्रालय ने इस दौरान सुरक्षा बलों की शहादत की संख्या को बताने से साफ परहेज किया है।
साऊथ एशिया टेररिज्म पोर्टल हाल में दिवंगत हुए पंजाब के पूर्व जांबाज पुलिस अफसर केपीएस गिल द्वारा शुरू किया गया है। इस पोर्टल के आंकड़ो के मुताबिक पहले एक सुरक्षा बल का जवान शहीद होता था तो उसकी तुलना में तीन आतंकी मारे जाते थे। अब एक जवान की शहादत पर दो आतंकी मारे जा रहे हैं। वहीं आम नागरिकों के मारे जाने का अनुपात करीब-करीब जस का तस है। इस साल 28 मई तक कुल 25 नागरिक जम्मू-कश्मीर में हिंसा-आतंकवाद की भेंट चढ़े। इस क्रम में सुरक्षा बलों के 25 कर्मी शहीद हुए और 60 आतंकी मारे गए।
2016 में 14 आम नागरिक, सुरक्षा बल के 88 जवानों की शहादत और 165 आतंकी मारे गए। 2015 में 20 आम नागरिक, 41 सुरक्षा बल के जवान और जवाब में 113 आतंकी हलाक हुए। 2014 में आम नागरिक सुरक्षा बलों के जवान आतंकी की यह संख्या क्रमश: 32, 51 और 110 की रही। 2013 में 61 सुरक्षा बल के जवानों की शहादत और 100 आतंकी मारे गए। 2011 में 16 नागरिकों की मौत हुई, 17 जवान शहीद और 84 आतंकी मारे गए। 2011 में 119 आतंकी मारे गए, सुरक्षा बल के 30 जवानों को जान से हाथ धोना पड़ा और इसकी तुलना में 270 आतंकी हलाक हुए।
2010 में कश्मीर घाटी, नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अशांति बढ़ गई थी। लेकिन इस दौरान 36 आम लोग हिंसा-आतंकवाद का शिकार हुए। आतंकियों से मोर्चा लेते हुए 69 जवानों को शहादत देनी पड़ी और मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने 270 आतंकियों को मार गिराया। इसके बरअक्स 2009 में 55 आम लोग, 78 सुरक्षाकर्मियों को जान से हाथ धोना पड़ा। इस दौरान सुरक्षा बलों ने 242 आतंकियों का खात्मा किया।