देश 3,695 लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं। इस याचिका में नए आपराधिक कानूनों को लागू होने से रोकने के लिए विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के नेताओं और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई सहयोगियों से दखल देने का आग्रह किया गया है। याचिका पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख नेताओं में तुषार गांधी, तनिका सरकार, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) सुधीर वोम्बटकेरे, तीस्ता सीतलवाड़, कविता श्रीवास्तव और शबनम हाशमी शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख जयंत चौधरी को संबोधित यह याचिका विभिन्न सियासी दलों के प्रमुख नेताओं को भेजी गई है। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी, आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और कई अन्य नेता शामिल हैं।
इसमें याचिकाकर्ताओं ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच, कानूनी विशेषज्ञ परामर्श और नए आपराधिक कानूनों के बारे में संसद में बहस की मांग की है।
याचिका में संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के महत्व पर जोर दिया गया है। इसमें तीन नए कानूनों भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय न्याय संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम के बारे में गंभीर चिताओं पर प्रकाश डाला गया है। इन तीनों कानूनों को बिना बहस के 20 दिसंबर 2023 को संसद के जरिए पारित किया गया था। इन कानूनों को एक जुलाई 2024 से लागू किए जाने की तैयारी है।
याचिकाकर्ता की दलील है कि ये कानून सख्त हैं और नागरिकों की आजादी के लिए खतरा हैं। जिसमें बोलने की आजादी,सभा करने का अधिकार, प्रदर्शन करने का अधिकार शामिल है। याचिका में कहा गया है कि ये नए कानून वैध और अहिंसक लोकतात्रिक कामों को 'आतंकवाद' के रूप में वर्गीकृत कर सकते हैं। याचिका में चिंता उठाई गई है कि प्राथमिकी की रिकॉर्डिंग पुलिस के विवेक पर होगी। कारावास की शर्तों की गंभीरता को बढ़ाया जा सकता है और सभी आरोपियों को सरकार को अपना बायोमेट्रिक डाटा प्रदान करने के लिए मजबूर किया जा सकता है।