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कारगिल विजय दिवस: पाक सेना प्रमुख की जिद का नतीजा था युद्ध, बरसों से सुलग रही थी नफरत की चिंगारी 

Fri, 24 Jul 2020 12:13 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली 
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nawaz sharif pervez musharraf kargil war - फोटो : फाइल, अमर उजाला
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कारगिल युद्ध में भारत को मिली विजय को 21 साल होने जा रहे हैं। ऑपरेशन विजय चलाते हुए भारत ने 26 जुलाई, 1999 को पाकिस्तान को पूरी तरह से खदेड़ते हुए जीत का ऐलान किया था। यह जंग ऐसे समय छिड़ी थी, जब दोनों देशों की सरकारों में शांति बहाल होने के प्रयास जारी थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पाक पीएम नवाज शरीफ के न्योते पर लाहौर गए। बस सेवा शुरू की गई। मगर दूसरी तरफ पाकिस्तान ने पीठ में छुरा घोंपते हुए कारगिल में हमला करने की साजिश रच डाली। कहा जाता है कि इस साजिश के बारे में खुद नवाज शरीफ को भी नहीं पता था। 

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दरअसल कारगिल पर कब्जे की साजिश कोई रातों रात नहीं रची गई थी। एक शीर्ष सैन्य अधिकारी के दिमाग में यह खिचड़ी कई बरसों से पक रही थी। सियाचिन में 1984 में भारत के हाथों मिली हार को वो पचा नहीं पा रहा था। उस समय वह पाकिस्तान की कमांडो फोर्स में मेजर हुआ करता था। इसलिए उसकी साजिश सियाचिन पर कब्जा करने की थी। इस योजना को बेनजीर भुट्टो के सामने पेश किया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इससे पहले जनरल जियाउल हक के सामने भी यह पेशकश हुई, लेकिन उन्होंने भी इसमें रुचि नहीं ली। 

सियाचिन में मिली हार जिस शख्स को बहुत बुरी लगी थी, उसका नाम है जनरल परवेज मुशर्रफ। 1999 में यही शख्य पाकिस्तानी सेना का प्रमुख था। इसलिए जब दोनों देशों के रिश्ते सुधर रहे थे, तो उसने बौखलाहट में यह कदम उठाया। 
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सियाचिन को अलग-थलग करने की थी साजिश 

nawaz sharif pervez musharraf kargil war - फोटो : फाइल, अमर उजाला
मीडिया खबरों के मुताबिक पाकिस्तान की योजना थी कि वो भारत की सुदूर उत्तर की टिप व सियाचिन ग्लेशियर एनएच 1डी को किसी तरह काट दिया जाए और उस पर अपना कब्जा कर लिया जाए। पाक ने योजना बनाई थी कि उन पहाड़ियों पर पहुंच कर रसद लेने लद्दाख जाने वाले काफिले की आवाजाही रोक दें। इससे मजबूर होकर भारत को सियाचिन छोड़ना पड़ जाएगा। 

दिलीप कुमार ने नवाज शरीफ को लगाई लताड़ 
बताया जाता है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पाक पीएम नवाज शरीफ से खासे नाराज थे। उन्होंने नवाज शरीफ को फोन कर काफी सुनाया। वाजपेयी ने कहा, 'एक तरफ लाहौर में गले मिलते हो, दूसरी तरफ कारगिल की पहाड़ियों पर कब्जा करते हो।' नवाज शरीफ जब इस पर सफाई दे रहे थे, तभी वाजपेयी ने कहा कि एक साहब मेरे पास बैठे हैं और वो आपसे बात करना चाहते हैं। 

नवाज शरीफ ने जब उस शख्स की फोन पर आवाज सुनी तो वो सकते में आ गए। फोन पर मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार थे। उन्होंने कहा, 'आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। आपने तो हमेशा दोनों देशों के बीच अमन की बात कही है।'
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