फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

13 देश करते हैं चक्रवातों का नामकरण, जानें, पुराने तूफानों से लेकर ताउते तक की कहानी

Sun, 16 May 2021 04:38 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला रिसर्च टीम

सार

  • ताउते चक्रवात ने दस्तक दे दी है, मंगलवार तक यह गुजरात के तट से टकरा सकता है।
  • यहां जानिए, ताउते समेत पहले आए अन्य चक्रवातों के नामकरण की कहानी...
विज्ञापन
cyclone tauktae - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत में इस साल के पहले चक्रवाती तूफान ने दस्तक दे दी है। ताउते नाम के इस चक्रवात को लेकर मौसम विभाग ने हाई अलर्ट जारी किया है। इसके मंगलवार तक गुजरात तट से टकराने की संभावना है। इसके चलते गुजरात और दीव के समुद्र तटों पर निगरानी रखी जा रही है।

विज्ञापन


वैसे, हरेक चक्रवात का नाम निर्धारित करने के पीछे एक खास प्रक्रिया है। यहां जानिए, ताउते समेत पहले आए अन्य चक्रवातों के नामकरण की कहानी...

यूं पड़ा ताउते का नाम
इसका नाम म्यांमार ने दिया था। यह बर्मी शब्द है, जिसका मतलब है - अधिक शोर करने वाली छिपकली।

13 देशों ने दिए 169 नाम
चक्रवातों का नाम विश्व मौसम विभाग/संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग एशिया व प्रशांत (डब्ल्यूएमओ/ईएससीएपी) पैनल ऑन ट्रॉपिकल साइक्लोन (पीटीसी) द्वारा किया जाता है। इस पैनल में 13 देश हैं। इनमें भारत, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, पाकिस्तान, मालदीव, ओमान, श्रीलंका, थाईलैंड, ईरान, कतर, सउदी अरब, यूएई और यमन शामिल हैं। ये देश तूफान के नामकरण का सुझाव देते हैं। पिछले साल हरेक देश ने 13 नाम सुझाए थे। इसके चलते चक्रवातों के 169 नामों की फेहरिस्त बनी थी।

इससे पहले 2004 में इस समूह में शामिल आठ देशों ने 64 नामों की सूची को अंतिम रूप दिया था। तब हरेक देश से आठ नाम आए थे। पिछले साल मई में भारत में आया चक्रवात अम्फान उस सूची में अंतिम नाम था। वहीं, इस सूची में पहला नाम निसर्ग का है, जो अरब सागर से उठा था। इसका नाम बांग्लादेश ने रखा था। नामकरण के लिए हर बार अलग देश का नंबर आता है।
विज्ञापन


चक्रवातों के नामकरण का फायदा
नामकरण से वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, आपदा प्रबंधक टीमों और आम जनता के लिए चक्रवातों को पहचानने व समझने में मदद मिलती है। अगर किसी क्षेत्र में दो तूफान एक साथ आ रहे हों तो इससे भ्रम की स्थिति नहीं बनती। आपदा चेतावनियां जारी करने और भविष्य में पिछले चक्रवातों का उल्लेख करने में नामकरण के कारण आसानी होती है।
विज्ञापन


नाम रखने का मानदंड
चक्रवातों का नाम सरल और छोटा रखा जाता है। यह ध्यान रखा जाता है कि इनका अर्थ सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील न हो या इनका भड़काऊ अर्थ न हो।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें