अध्ययन में सामने आया कि प्रदेश में धूप कम मिलने और लंबी सर्दियों के कारण हड्डियों के कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में नवंबर से मार्च तक तापमान काफी गिर जाता है। ठंड से बचने के लिए लोग ऊनी कपड़ों से खुद को ढके रखते हैं और अधिकतर समय घरों के भीतर बिताते हैं। त्वचा का सूर्य की पराबैंगनी किरणों से पर्याप्त संपर्क न होने के कारण शरीर में प्राकृतिक रूप से विटामिन डी-3 का निर्माण कम हो सकता है। विटामिन डी की कमी से शरीर में कैल्शियम के अवशोषण पर असर पड़ता है।
ऐसे में शरीर कैल्शियम की जरूरत पूरी करने के लिए हड्डियों से कैल्शियम लेने लगता है, जिससे वे धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। बढ़ती उम्र और कैल्शियम की के कारण भी ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ कमी जाता है। इस बीमारी में हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है और उनकी मजबूती घट जाती है। ऐसी स्थिति में मामूली चोट लगने पर भी हड्डी में फ्रैक्चर हो सकता है। चिंताजनक बात यह है कि शुरुआती चरण में बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देते। इस कारण कई बार बीमारी का पता तब चलता है, जब हड्डी में फ्रैक्चर हो जाता है। ऐसे लोगों को विशेष ध्यान रखना होगा।
लक्षण..
लगातार कमर या पीठ में दर्द रहना। लंबाई में कमी आना या शरीर झुक जाना। मामूली चोट लगने पर कलाई या रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होना
बचाव...
पर्याप्त समय तक धूप के संपर्क में रहें। आहार में कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ और साबुत अनाज शामिल करें। प्रोटीन युक्त संतुलित भोजन का सेवन करें। नियमित व्यायाम करें। धूम्रपान से बचें।
मामूली चोट पर फ्रैक्चर का खतरा
रिपन अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक व हड्डियों के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. लोकेंद्र रॉकी ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी बीमारी है, जिसमें हड्डियों का घनत्व कम होने से वे कमजोर हो जाती हैं। इससे मामूली चोट या गिरने पर भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और गिरने से बचाव बेहद महत्वपूर्ण हैं। समय पर जांच और उचित उपचार से हड्डियों को स्वस्थ रखने तथा फ्रैक्चर का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है। जिन लोगों में इस बीमारी का खतरा अधिक है, उन्हें समय पर जांच करवाकर उचित उपचार लेना चाहिए। डॉ. राजेश सूद, हड्डी रोग विशेषज्ञ, आईजीएमसी