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विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस: साठ फीसदी वयस्कों में विटामिन डी-3 की कमी, कमजोर हो रहीं हड्डियां

Tue, 20 Oct 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

हिमाचल  प्रदेश में हुए विभिन्न अध्ययन में सामने आया है कि महिलाओं को इस बीमारी के जोखिम, बचाव और जीवनशैली में जरूरी बदलावों की पर्याप्त जानकारी नहीं है। 
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क्या है ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी? - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 हिमाचल प्रदेश में 60 फीसदी वयस्क आबादी विटामिन डी-3 की कमी से जूझ रही है। इसमें महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी शामिल हैं। विटामिन डी-3 की कमी धीरे-धीरे हड्डियों को कमजोर बना रही है। इससे लोगों में ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। बुजुर्गों और मेनोपॉज के बाद महिलाओं में इसका खतरा अधिक रहता है, क्योंकि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेजी से गिरता है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के एंडोक्राइनोलॉजी और हड्डी रोग विभाग की ओर से 2025 और 2026 में किए गए अध्ययनों में यह बात सामने आई है। वर्ष 2026 में प्रकाशित अध्ययन के तहत ओपीडी में आने वाले 1,200 मरीजों से जानकारी जुटाई गई।

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अध्ययन में सामने आया कि प्रदेश में धूप कम मिलने और लंबी सर्दियों के कारण हड्डियों के कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में नवंबर से मार्च तक तापमान काफी गिर जाता है। ठंड से बचने के लिए लोग ऊनी कपड़ों से खुद को ढके रखते हैं और अधिकतर समय घरों के भीतर बिताते हैं। त्वचा का सूर्य की पराबैंगनी किरणों से पर्याप्त संपर्क न होने के कारण शरीर में प्राकृतिक रूप से विटामिन डी-3 का निर्माण कम हो सकता है। विटामिन डी की कमी से शरीर में कैल्शियम के अवशोषण पर असर पड़ता है।

ऐसे में शरीर कैल्शियम की जरूरत पूरी करने के लिए हड्डियों से कैल्शियम लेने लगता है, जिससे वे धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। बढ़ती उम्र और कैल्शियम की के कारण भी ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ कमी जाता है। इस बीमारी में हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है और उनकी मजबूती घट जाती है। ऐसी स्थिति में मामूली चोट लगने पर भी हड्डी में फ्रैक्चर हो सकता है। चिंताजनक बात यह है कि शुरुआती चरण में बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देते। इस कारण कई बार बीमारी का पता तब चलता है, जब हड्डी में फ्रैक्चर हो जाता है। ऐसे लोगों को विशेष ध्यान रखना होगा।

लक्षण.. 
लगातार कमर या पीठ में दर्द रहना। लंबाई में कमी आना या शरीर झुक जाना। मामूली चोट लगने पर कलाई या रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होना

बचाव...
पर्याप्त समय तक धूप के संपर्क में रहें। आहार में कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ और साबुत अनाज शामिल करें। प्रोटीन युक्त संतुलित भोजन का सेवन करें। नियमित व्यायाम करें। धूम्रपान से बचें।
 

मामूली चोट पर फ्रैक्चर का खतरा
रिपन अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक व हड्डियों के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. लोकेंद्र रॉकी ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी बीमारी है, जिसमें हड्डियों का घनत्व कम होने से वे कमजोर हो जाती हैं। इससे मामूली चोट या गिरने पर भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
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ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और गिरने से बचाव बेहद महत्वपूर्ण हैं। समय पर जांच और उचित उपचार से हड्डियों को स्वस्थ रखने तथा फ्रैक्चर का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है। जिन लोगों में इस बीमारी का खतरा अधिक है, उन्हें समय पर जांच करवाकर उचित उपचार लेना चाहिए। डॉ. राजेश सूद, हड्डी रोग विशेषज्ञ, आईजीएमसी
 
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