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हिमाचल: ससुर के अतिक्रमण पर बहू क्यों अयोग्य? हाईकोर्ट ने सरकार से तलब किया जवाब

Sat, 16 May 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

 सरकारी जमीन पर ससुर की ओर से किए गए अतिक्रमण के बाद बहू को चुनाव लड़ने के लिए आयोग करार देने के मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में सरकारी जमीन पर ससुर की ओर से किए गए अतिक्रमण के बाद बहू को चुनाव लड़ने के लिए आयोग करार देने के मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को इस मामले में चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने फिलहाल याचिकाकर्ता को तुरंत राहत देने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस रिट याचिका के लंबित रहने का मतलब यह नहीं है कि याचिकाकर्ता कानून के अनुसार अपनी शिकायतों के निवारण के लिए चुनाव याचिका दायर नहीं कर सकती।

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मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। तब तक सरकार को इस कानूनी स्थिति पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा कि क्या परिवार के किसी अन्य सदस्य के अतिक्रमण का खामियाजा उम्मीदवार को भुगतना पड़ेगा। यह मामला हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन अध्यादेश) 2026 की व्याख्या से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने रिटर्निंग अधिकारी की ओर से 12 मई 2026 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसका नामांकन खारिज कर दिया गया था।
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चुनाव अधिकारी ने हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम, 1994 की धारा 122(1)(ई) और नए अध्यादेश का हवाला देते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता के ससुर ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया है, इसलिए वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हैं। याचिका में बताया गया है कि कानून की व्याख्या गलत तरीके से की जा रही है। उन्होंने दलील दी कि अध्यादेश के अनुसार यदि बहू अतिक्रमण करती है, तो उसका ससुर चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो सकता है। लेकिन, यदि अतिक्रमण ससुर द्वारा किया गया है, तो उस आधार पर बहू को चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है। याचिकाकर्ता काजल ने अपनी उम्मीदवारी रद्द किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
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