विशेष न्यायालय में ASI पंकज को पेश करने ले जाती सीबीआई की टीम
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पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के मुख्य अभियंता विमल नेगी की मौत के मामले में सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार एएसआई पंकज शर्मा को सोमवार को सीबीआई ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप सिंह सिहाग की अदालत में पेश किया। सीबीआई ने अदालत से 5 दिन की पुलिस रिमांड मांगी, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एक दिन का अतिरिक्त रिमांड दिया। अब इस मामले में मंगलवार दोपहर 3 बजे फिर सुनवाई होगी। साथ ही पंकज शर्मा की जमानत अर्जी पर भी अदालत फैसला लेगी।
सीबीआई ने रविवार देर रात भी पंकज को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आधिकारिक आवास में पेश किया था और 24 घंटे का रिमांड हासिल किया था। आरोपी पंकज शर्मा के वकील पीयूष वर्मा ने सीबीआई की रिमांड याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि पंकज पूरी तरह से जांच में सहयोग कर रहा है और अचानक गिरफ्तारी का कोई औचित्य नहीं है। सुनवाई के बाद मीडिया से बात करते हुए पीयूष वर्मा ने कहा कि पंकज को सीबीआई ने रविवार दोपहर करीब 12:00 बजे गिरफ्तार किया और देर रात कोर्ट में पेश कर एक दिन का रिमांड हासिल किया। सोमवार को सीबीआई ने फिर से रिमांड मांगा, जिसका हमने विरोध किया और साथ ही बेल एप्लीकेशन भी दायर की।
पंकज शर्मा की पत्नी ने पहले ही हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में एक क्रिमिनल रिट पिटीशन दाखिल कर रखी है, जिसमें प्रदेश पुलिस और सीबीआई पर पंकज शर्मा को 23 मई से गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने और उनकी आवाजाही पर पाबंदी लगाने का आरोप लगाया गया है। हाईकोर्ट ने 5 सितंबर को आदेश दिया था कि शर्मा को स्वतंत्र किया जाए और उन्हें मुक्त आवाजाही की अनुमति दी जाए। अदालत में सीबीआई और प्रदेश पुलिस ने पंकज शर्मा की स्वतंत्र रूप से आवाजाही के खिलाफ एतराज नहीं जताया था। अब जबकि पंकज शर्मा जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं तो सीबीआई को उनकी कस्टडी की क्या आवश्यकता है।
पंकज ने लगाया था गलत तरीके से निगरानी में रखने का आरोप
एएसआई पंकज ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि उसे गलत तरीके से लगातार निगरानी में रखा जा रहा है और सरकारी आवास में रहने की अनुमति नहीं दी जा रही, जो अधिकारों का उल्लंघन है। 5 सितंबर को हाईकोर्ट ने एएसआई पंकज को अपने घर जाने की अनुमति दे दी थी। उसकी पत्नी की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह छूट दी गई। सुनवाई के दौरान सीबीआई और राज्य सरकार ने बताया था कि पंकज शर्मा को किसी प्रकार का खतरा नहीं है और वह स्वतंत्र रूप से कहीं भी जा सकते हैं।
हाईकोर्ट ने भी सीबीआई पर जताया था भरोसा
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा था कि एसआईटी ने दो महीने से अधिक समय से इस संबंध में कोई ठोस जांच नहीं की है, जबकि मृतक का परिवार शुरू से ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की शिकायत कर रहा है। कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि सीबीआई निष्पक्ष और शीघ्रता से जांच पूरी करेगी। मामला आत्महत्या से जुड़ा है या हत्या से, सीबीआई इसके बारे में सच्चाई सामने आएगी। हिमाचल प्रदेश के डीजीपी और एसआईटी के बीच जांच को लेकर मतभेद के चलते मामला सीबीआई को सौंपा जा रहा है। अदालत ने एसीएस और डीजीपी की रिपोर्ट के आधार पर एसपी शिमला की एसआईटी की जांच पर भी प्रश्नचिह्न लगाए हैं।