पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक डीसी राणा ने बुधवार को बताया कि यह निर्णय प्लास्टिक से बनी पानी की छोटी बोतलों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण को नुकसान होने के चलते लिया है। यह प्रतिबंध सभी होटलों पर लागू होगा। प्लास्टिक के स्थान पर कांच की बोतलें, स्टील के कंटेनर व वाटर डिस्पेंसर जैसे पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाए जाएंगे। सरकारी संस्थाएं जागरूकता अभियान चलाएंगी।
सरकार ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को प्रतिबंधित वस्तुओं के उल्लंघन पर जुर्माने के अधिकार दिए हैं। एक बार उपयोग होने वाली प्लास्टिक की वस्तुएं, खाद्य सामग्री परोसने या उपयोग में लाई जाने वाली कंपोस्टेबल या बायोडिग्रेडेबल थालियां सड़कों, ढलानों, नालियों, जंगलों, सार्वजनिक स्थानों, मंदिर परिसरों, रेस्तरां, ढाबों, दुकानों व दफ्तरों आदि में फेंकने पर पांच हजार जुर्माने का प्रावधान किया है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी और मोटर वाहन निरीक्षक उन्हीं वाहनों को पास करेंगे या पंजीकरण देंगे, जिनमें कार बिन्स लगाए गए हों।