ऊना। जिला में बीते कुछ दिनों से बारिश न होने और तेज धूप खिलने से जमीन में नमी कम होने लगी है। इसके चलते किसान खेतों में दोबारा सिंचाई करने में जुट गए हैं। हालांकि क्षेत्र में बादल छाए रहने का क्रम जारी है, लेकिन फसलों के लिहाज से पर्याप्त बारिश नहीं हो रही। यही कारण है कि किसान खेतों को सिंचित कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिला में इस समय मुख्यतः गेहूं और आलू की फसल तैयार की जा रही है। इसमें गेहूं 3000 हेक्टेयर और आलू करीब 500 हेक्टेयर में उगाई जा रही है। इस दोनों फसलों को समय-समय पर सिंचाई की आवश्यकता रहती है, लेकिन गेहूं की फसल पर बड़ा संकट उस समय मंडराया, जब इसकी बुआई के बाद करीब ढाई माह तक बारिश नहीं हुई। इससे किसानों को गेहूं की फसल बर्बाद होने की चिंता सताने लग है। हालांकि फरवरी माह की शुरुआत में बारिश होने से किसानों को थोड़ी राहत मिली और गेहूं की फसल की वृद्धि में भी तेजी आई। वहीं, अब खेतों में फसलों के लिए आवश्यक नमी कम होने लगी है।
जिले में 60 प्रतिशत क्षेत्र गैरसिंचित जिले के करीब 60 प्रतिशत इलाके ऐसे हैं, जहां सिंचाई की सुविधा नहीं है। बंगाणा, चिंतपूर्णी, दौलतपुर चौक, गगरेट के कई गांवों बारिश पर निर्भर है। उक्त क्षेत्रों में गेहूं और मक्की ही उगाई जाती है। किसान रविंद्र चंद, प्रेम सिंह, सुदर्शन कुमार, विनोद सैनी, साहिल कुमार ने बताया कि फसल को अब दाना पड़ना शुरू हो जाएगा। ऐसे समय में सिंचाई समय पर होना बेहद जरूरी है। उसका सीधा असर पैदावार पर होगा।
कोट्स
जिले में गेहूं की फसल अच्छे तरीके से तैयार हो रही है। फसलों से जुड़ी समस्याओं को जानने के लिए हमारी टीमें लगातार सक्रिय हैं। वर्तमान में बारिश का होना फसलों के लिए वरदान साबित होगा। अगर किसानों को फसल से जुड़ी किसी भी प्रकार की समस्या पेश आए, तो वे विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग।