वैकल्पिक व्यवस्था से ही चलाया जा रहा वर्तमान में काम
ग्रामीणों के विरोध से बढ़ीं जल शक्ति विभाग की दिक्कतें
जमीन के बदले पैसे की कर रहे मांग, हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार
जसवीर ठाकुर
ऊना। सवा 12 करोड़ की योजना भी माता चिंतपूर्णी मंदिर के टॉप तक पानी की सप्लाई सीधे तौर पर मुहैया नहीं करवा पाई है। वर्तमान में वैकल्पिक व्यवस्था से मंदिर के टॉप तक पानी पहुंचाया जा रहा है। अगर प्रशासन इस दिशा में पहल करे तो ग्रामीणों के साथ समन्वय स्थापित करके समस्या का समाधान किया जा सकता है। वर्तमान में जल शक्ति विभाग की ग्रामीणों के विरोध के चलते दिक्कतें बढ़ गई हैं। जल शक्ति विभाग की इस योजना के तहत 18 किलोमीटर लंबी लाइन में जहां 10000 के करीब उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर 12 लाख लीटर पानी का उपभोग उपभोक्ता कर रहे हैं लेकिन मंदिर के टॉप तक योजना का सीधे तौर पर लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण जमीन के बदले पैसे लेने की मांग पर अड़े हुए हैं और वर्तमान में यह मसला हाईकोर्ट के दरबार तक पहुंच गया है। जल शक्ति विभाग भी हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है। योजना के तहत चार टैंक बनाए गए हैं। इनमें ओवरहेड टैंक और जल संग्रहण टैंक शामिल हैं। साथ ही कांगड़ा जिले की भी कुछ पंचायतें इसके दायरे में आती हैं। बाकी चिंतपूर्णी का क्षेत्र और उसके साथ लगती पांच पंचायतें भी शामिल हैं। 80 फीसदी स्कीम पूरी तरह से संचालित हो गई है लेकिन 20 फीसदी हिस्सा चिंतपूर्णी माता मंदिर के टॉप तक का अभी भी इस सुविधा से सीधे तौर पर जुड़ने से रह गया है।
जल शक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता ई. नरेश धीमान का कहना है कि प्रशासन इस दिशा में पहल करे तो चिंतपूर्णी माता मंदिर के टॉप तक सीधे तौर पर इस योजना के तहत पानी पहुंचाया जा सकता है। वर्तमान में पुराने तरीके से ही वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। उन्होंने लोगों से भी इस दौरान सहयोग की अपील की है।
जल शक्ति विभाग अंब के अधिशासी अभियंता ई. होशियार सिंह का कहना है कि स्कीम का 80 फीसदी काम पूरा हो गया है। रोजाना 12 लाख लीटर पानी का इस्तेमाल हो रहा है। 18 किलोमीटर लंबी योजना है जहां पर विभाग ने विभिन्न टैंक और पाइपों के माध्यम से लोगों को पेयजल की सुविधा मुहैया करवाई है।