मरीजों को करना पड़ रहा निजी अस्पतालों का रुख
वरिष्ठ नागरिक फोरम कई बार उठा चुका है मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले की करीब छह लाख की आबादी के लिए कोई भी यूरोलॉजिस्ट नहीं है। इससे मरीजों को निजी अस्पतालों और राज्य से बाहर जाकर उपचार करवाना पड़ रहा है। जिले में विशेषज्ञ की तैनाती के लिए वरिष्ठ नागरिक फोोरम ऊना कई बार मांग उठा चुकी है। फोरम ने फिर सरकार से यूरोलॉजिस्ट की तैनाती को लेकर मांग उठाई है।
जिले में यूरोलॉजिस्ट न होने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वरिष्ठ नागरिक फोरम के अध्यक्ष जीआर वर्मा ने कहा कि यूरोलॉजी से संबंधित दिक्कतें सबसे अधिक बुजुर्गों को रहती हैं। ऐसे में उम्र के इस पड़ाव में मरीज को मजबूरन निजी अस्पतालों और पीजीआई चंडीगढ़ का रुख करना पड़ रहा है। ऐसे में चंडीगढ़ आने-जाने व पीजीआई में उपचार के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। कहा कि जब जिले में निजी स्तर पर यूरोलॉजिस्ट की सुविधा मिल सकती है तो सरकारों को भी इस तरफ ध्यान देना चाहिए। सरकारी अस्पतालों के लिए बड़े-बड़े भवनों का निर्माण तो हो रहा है लेकिन भवन बनाने के साथ विशेषज्ञों की तैनाती के लिए भी प्रयास करने चाहिए। फोरम के अन्य सदस्यों ने कहा कि जिले के सबसे बड़े अस्पताल में अल्ट्रासाउंड तक की सुविधा लोगों को नहीं मिल रही है। ऐसे में इन गंभीर समस्याओं पर विभाग व सरकार को ध्यान देना चाहिए।
कोटस
इस मांग को उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा गया है। अभी मेडिकल कॉलेजों में ही यूरोलॉजिस्ट की सुविधा मिलती है।
- डॉ. संजय मनकोटिया, चिकित्सा अधीक्षक, क्षेत्रीय अस्पताल ऊना