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Una News: स्कूलों में अवकाश को लेकर रहा दुविधा का माहौल

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बच्चे स्कूल गए, बाद में छुट्टी का पता चलने पर लौटाए घर
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बच्चों को अचानक घर भेजे जाने से अभिभावक भी नजर आए हैरान
कुछ निजी स्कूलों ने लौटाए विद्यार्थी, कुछ में नियमित लगीं कक्षाएं

संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन पर प्रदेश सरकार की ओर से घोषित अवकाश को लेकर जिला के स्कूलों में शुक्रवार सुबह दुविधा का माहौल रहा। छुट्टी की आधिकारिक जानकारी न होने के चलते सभी स्कूल नियमित तरीके से शुरू हुए। बच्चे और अध्यापक स्कूलों में पहुंचे लेकिन कुछ देर बाद पता चला कि सरकार ने आज छुट्टी घोषित कर दी है। इसके बाद सुबह 10 बजे विद्यार्थी घर को लौटते नजर आए।
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जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार की ओर से घोषित अवकाश का स्कूलों को शुक्रवार सुबह आधिकारिक तौर पर कोई सूचना नहीं थी। ऐसे में सभी सरकारी व निजी स्कूलों के लिए प्रतिदिन की तरह विद्यार्थी व शिक्षक गए। प्रार्थना सभा के बाद जैसे ही कक्षाएं शुरू हुईं तो विभाग की ओर से आधिकारिक जानकारी आई कि दो दिन छुट्टी है। इसके बाद स्कूल प्रबंधन भी दुविधा में पड़ गए कि बच्चों को घर भेजें या नहीं। ऐसे इसलिए भी रहा कि कई बच्चों को उनके अभिभावक स्कूल छोड़ने और लेने आते हैं। अचानक छुट्टी घोषित करने से उन बच्चों के लिए परेशानी बढ़ जाती है। खासकर कई निजी स्कूलों में ऐसा दृश्य नजर आया। इसके बाद ऐसे बच्चों के अभिभावकों को सूचित कर छुट्टी की गई। वहीं, कई निजी स्कूल ऐसे भी रहे, जहां प्रतिदिन की तरह नियमित कक्षाएं लगाई गईं। जबकि कुछ स्कूलों में दोपहर 12 बजे के आसपास छुट्टी की गई। खराब मौसम के बीच बच्चे घर लौटे। कई स्कूल बसें सड़कों पर आवाजाही करतीं नजर आई। अभिभावकों में सुनील कुमार, राजेश शर्मा, विवेक कुमार, राजविंद्र कौर, सुखविंद्र सिंह ने बताया कि प्रशासन को ऐसे आदेशों को स्पष्टता के साथ सार्वजनिक करना का रास्ता तलाशना होगा। कहा कि कई बार अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने के बाद किसी कार्य से बाहर होते हैं। ऐसे बच्चों को स्कूल से एकाएक लौटाना उनकी सुरक्षा पर सवाल है। इसे लेकर पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए। उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग राजेंद्र कौशल ने बताया कि छुट्टी की सूचना मिलते ही सभी संस्थानों को इससे अवगत करवाया गया। उन्होंने कहा कि स्कूलों ने अभिभावकों के साथ पूरे सहयोग के बीच बच्चे घर लौटाए। इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई।
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