ऊना। जिले में इन दिनों पशु चारे के रूप में इस्तेमाल होने वाली तूड़ी के दाम सातवें आसमान पर पहुंच गए हैं। बढ़ती कीमतों ने पशुपालकों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हालात यह हैं कि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उपलब्धता न होने के कारण किसानों को पड़ोसी राज्य पंजाब से करीब 1000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से तूड़ी खरीदनी पड़ रही है।
किसानों का कहना है कि हर वर्ष जनवरी से फरवरी माह के मध्य तूड़ी के भाव मनमाने तरीके से बढ़ा दिए जाते हैं। इस बार भी यही स्थिति बनी हुई है, जिससे दुग्ध उत्पादन से जुड़े छोटे पशुपालक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि पशुओं के लिए चारा अनिवार्य जरूरत है। ऐसे में बढ़े हुए दामों का सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ रहा है। कई किसानों ने बताया कि पहले जो तूड़ी 600 से 700 रुपये प्रति क्विंटल मिल जाती थी, अब वही 1000 रुपये तक पहुंच गई है। परिवहन खर्च अलग से देना पड़ रहा है। इससे दूध उत्पादन की लागत बढ़ गई है जबकि दूध के दामों में उतनी बढ़ोतरी नहीं हुई है।
पशुपालकों ने मांग की है कि सरकार पशु चारे की कीमतें निर्धारित करे ताकि बिचौलियों द्वारा की जा रही मनमानी पर रोक लग सके। उनका कहना है कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में पशुपालन पर संकट गहरा सकता है।
किसानों ने प्रशासन से भी आग्रह किया है कि स्थानीय स्तर पर चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और भंडारण व्यवस्था को मजबूत किया जाए ताकि हर वर्ष इस तरह की स्थिति पैदा न हो।
उपनिदेशक जिला पशुपालन विभाग वीरेंद्र सिंह पटियाल ने बताया कि तूड़ी पशुओं के मुख्य चारे में से एक है। इसके दाम तय रखने के लिए अभी मानक तय नहीं हैं। इसको लेकर भविष्य में कोई योजना या निर्देश होंगे तो उसके तहत कार्य किया जाएगा।