लोगों को फिर से भाने लगा बेलने का ताजा रस और देसी शक्कर
जिले में गुड़ 130 और शक्कर 150 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेलन पर बिक रही
सतीश शर्मा
नारी/ऊना। जिले में आज भी कुछ चुनिंदा स्थानों पर लोग अपने पुराने बेलन को विरासत के रूप में संजोए हुए हैं। वहीं, कुछ लोग बेलन की महत्ता को समझते हुए इसे पुनः अपनाने लगे हैं। ऊना जिला के बरनोह, नारी, भदसाली, खड्ड, बढ़ेहड़ा राजपूतां, लोहारली समेत अन्य क्षेत्रों में लोग घर में तैयार गन्ने के रस और शक्कर को स्वाद बाजारों में लेकर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि बेलन का पुराना कार्य दोबारा शुरू करके उन्हें आनंद मिलता है और साथ ही शुद्ध चीजें प्राप्त होती हैं, जिससे स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। क्षेत्र के निवासियों रामपाल, देसराज, सुरेश कुमार, हरीश कुमार, ब्रेम सिंह, और शशि पाल का कहना है कि पुरानी विरासत को पुनः जीवित होते देख उन्हें अत्यधिक खुशी हो रही है। धीरे-धीरे लोग इसे अपना रहे हैं और गन्ने की खेती की ओर रुझान बढ़ा है, क्योंकि आजकल खाने-पीने की चीजों में शुद्धता की कमी देखी जा रही है, जिससे बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।उन्होंने कहा कि सड़कों के किनारे लगे बेलन आज भी एक जीवंत प्रतीक बनकर खड़े हैं। भले ही आज लोग सड़कों पर कारों में यात्रा कर रहे हैं, लेकिन बेलन नजर आते ही ताजे गन्ने का रस पीने का अनुभव नहीं छोड़ते। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है कि बेलन के मालिक आज भी आने वाले व्यक्ति को मुफ्त में गन्ने का रस पिलाते हैं।
पचास वर्ष पूर्व बेलन में बैल को जोत कर गन्ने का रस निकाला जाता था, जबकि अब ट्रैक्टर की मोटर के माध्यम से यह काम किया जा रहा है। जिले में गुड़ 130 प्रति किलो और शक्कर 150 प्रति किलो के हिसाब से बेलन पर ही बिकती है। खासकर कई शहरी लोग गुड़ और शक्कर खरीदने के लिए गांव का रुख कर रहे हैं।