बसोली स्कूल में बच्चों को योग सिखाते हुए डीपीई जगजीत सिंह। संवाद
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नारी (ऊना)। कोरोना महामारी के दौरान लगभग दो साल से घरों में बैठने का प्रभाव बच्चों के स्वभाव पर भी पड़ा है। लंबे अरसे बाद स्कूल पहुंचे कई बच्चों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन और कई बच्चों में मोटापे के समस्या आई है।
घर से बाहर न निकलने के कारण कई बच्चे ऑफलाइन पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद जैसी गतिविधियों से भी वंचित रहे, जिसका असर उनके आत्मविश्वास पर पड़ा। ऐसे में स्कूल खुलने पर अध्यापकों के सामने बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ठीक रखना भी एक चुनौती बन गया। अब स्कूलों में अध्यापक बच्चों में आत्मविश्वास जगाने के लिए कक्षा में पढ़ाने से पहले उनको प्रेरक प्रसंग और देश के महापुरुषों की जीवनी के बारे में बता रहे हैं। इस पर विशेष रूप से प्रत्येक दिन भाषण दिए जा रहे हैं। क्षेत्र के स्कूलों में प्रधानाचार्यों ने चार या पांच अध्यापकों की कमेटियां बनाई है। इन कमेटियों में वे अध्यापक शामिल हैं, जिनमें बच्चों में आत्मविश्वास जगाने की भरपूर क्षमता है। वहीं, बच्चों को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए रोजाना योग व अन्य व्यायाम करवाए जा रहे हैं।
धमांदरी स्कूल प्रधानाचार्य नवीन गुप्ता ने बताया कि बच्चों में जोश भरने और राष्ट्र प्रेम जागृत करने के लिए महाराणा प्रताप, शहीद भगत सिंह, महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस जैसी महान हस्तियों की जीवनी पढ़ाई जा रही है। कहा कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और खेल गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कि इन कोशिशों का असर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा है और स्कूल खुलने से लेकर अब तक बच्चों के स्वभाव में काफी सुधार है।
बदोली स्कूल के प्रधानाचार्य जीत कुमार वर्मा ने बताया कि इस समय बच्चों के परीक्षाएं चल रही हैं। कहा कि बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए उन्हें परीक्षा खत्म होने के बाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े किस्से सुनाए जा रहे हैं। इससे बच्चे भी उत्साहित नजर आते हैं। कहा कि बच्चों के लिए स्कूलों का लगातार खुलना बेहद जरूरी है।
बसोली स्कूल के डीपीई जगजीत सिंह ने बताया कि बच्चे अगर स्वस्थ होंगे तभी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। कहा कि वे बच्चों को प्रतिदिन सुबह प्राणायाम और योग करवा रहे हैं। कहा कि शुरुआत में दो बच्चे थोड़े सुस्त नजर आते थे अब उन पर योग और व्यायाम का सकारात्मक असर पड़ है। उनका मन खेल के साथ पढ़ाई में भी एकाग्र हो रहा है और आत्मविश्वास जगाने में भी मदद मिली है। धुसाड़ा स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. देसराज ने बताया कि बच्चों ने व्यवहार में आए बदलाव में सुधार के लिए स्कूल में अध्यापकों की कमेटियां बनाई गई हैं। इसमें उन अध्यापकों को शामिल किया गया है, जो बच्चों के व्यवहार को परखने में माहिर हैं। कहा कि कमेटी सदस्य बच्चों को प्रेरणादायक किस्से और कहानियां सुनाने के लिए अलग कक्षा लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये कोशिशें रंग ला रही हैं और बच्चे हर गतिविधि में पहले के मुकाबले ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं।